बिजली दरों में 25 फीसदी की बढोत्तरी का मामला...नियामक आयोग ने पॉवर कारपोरेशन को थमाया नोटिस

बिजली दरों में 25 फीसदी की बढोत्तरी का मामला...नियामक आयोग ने पॉवर   कारपोरेशन को थमाया नोटिस

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली दरों में 25 फीसदी तक की बढोत्तरी के प्रस्ताव को लेकर विद्युत नियामक आयोग ने पावर कारपोरेशन को नोटिस जारी कर पूछा है कि उदय स्कीम का अनुबन्ध करने के बाद बिजली कम्पनियों ने उपभोक्ताओं को अतिरिक्त लाभ क्यों नहीं दिया। नोटिस में पूछा गया है कि बिजली कंपनियों ने वर्ष 2०16-17 तक उपभोक्ताओं का अतिरिक्त लगभग 11,851 करोड़ का लाभ क्यों नहीं दिया। आयोग ने इस संबंध में 15 दिनों के भीतर पावर कारपोरेशन को जवाब देने को कहा है। आयोग ने इस संबंध में उपभोक्ताओं और सभी पक्षों को दिये दो विकल्प दिये हैं कि या तो उपभोक्ताओं को 2.5 से 5 प्रतिशत समय से बिजली बिल जमा करने पर दी जाये छूट दी जाये अथवा तो दरों में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की जाये। उपभोक्ता परिषद का दावा है कि अब आने वाले समय में रेगूलेटरी सरचार्ज 4.28 प्रतिशत समाप्त होगा वहीं बिजली दरों में बढ़ोत्तरी कराना कम्पनियों के लिये मुश्किल भरा होगा। उपभोक्ताओं का 11,851 करोड़ का लाभ बिजली कम्पनियों की सब्सिडी के बाद मौजूदा प्रस्ताव में लगभग 9००० करोड़ का अंतर होगा। ऐसे में अतिरिक्त 3,851 करोड़ का लाभ के लिये बिजली दरों में हो व्यापक कमी आयेगी। परिषद के अध्यक्ष अवेधेश वर्मा ने बुधवार को बताया कि प्रदेश की बिजली कम्पनियां वर्ष 2०19-2० में सब्सिडी के बाद लगभग नौ हजार करोड़ का गैप दिखाकर प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दरों में व्यापक बढ़ोत्तरी कराने की जुगत में लगी थी वहीं नियामक आयोग के एक निर्णय ने बिजली कम्पनियों में भूचाल ला दिया है। यह मामला तब का है जब वर्ष 2०16 में बिजली कम्पनियों का कुल घाटा 7०,738 करोड़ था और राज्य की बिजली कम्पनियों ने उदय स्कीम के साथ अनुबन्ध किया जिसमें घाटे का 53,211 करोड़ बैंकों लोन था जिसका 75 प्रतिशत यानी 39,9०8 करोड़ रूपये राज्य सरकार ने वहन कर लिया। इस आधार पर परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने विद्युत नियामक आयोग में याचिका दाखिल कर पूराने घाटे के एवज में लग रहे रेगूलेटरी सरचार्ज 4.28 प्रतिशत को समाप्त करने और उदय की लाभ को प्रदेश की जनता को देने की मांग उठायी और इसी बीज कैरिंग कास्ट वसूलने के मामले पर एप्टेल का एक निर्णय भी आ गया जिसको उपभोक्ता परिषद ने आधार बनाकर आयोग को सौंपा। श्री वर्मा ने कहा कि विद्युत नियामक आयोग द्वारा वह प्रपत्र जिसमें रेगूलेटरी असेट के मद में उपभोक्ताओं का बिजली कम्पनियों पर 11,851 करोड़ रूपये निकल रहा है उसे आयोग ने अपनी वेबसाइट पर डाल दिया है और प्रदेश के उपभोक्ताओं व सभी पक्षों से 15 दिन में सुझाव व आपत्ति मांगी है जिसमें आयोग द्वारा विद्युत उपभोक्ताओं के लिये दो विकल्प दियें गये या तो इसकी भरपाई करने के लिये उद्योगों को 2.5 प्रतिशत समय से बिल जमा करने पर छूट दी जाये और घरेलू सहित अन्य उपभोक्ताओं को समय से बिल जमा करने पर 5 प्रतिशत की छूट दी जाये आगे रेगूलेटरी सरचार्ज समाप्त किया जाये और दूसरा विकल्प यह दिया है आने वाले समय में उदय स्कीम के तहत जो लाभ उपभोक्ताओं को मिलना है उसके ऐवज में कोई भी बढ़ोत्तरी न की जाये। उन्होंने कहा अब जब उपभोक्ताओं को लाभ दिये जाने के मद में उदय स्कीम के तहत 11,851 करोड़ उपभोक्ताओं का बिजली कम्पनियों पर अतिरिक्त निकल रहा है और वर्तमान में बिजली कम्पनियों का सब्सिडी के बाद 9००० करोड़ का गैप वर्तमान एआरआर में निकला है तो जो उपभोक्ताओं का बचा लगभग 3851 करोड़ बच रहा है उसके ऐवज में उपभोक्ताओं के बिजली दरों में व्यापक कमी की जाये और इस बात की जांच होनी चाहिये कि उदय स्कीम आने के बाद राजस्थान, तेलांगाना, बिहार व तमिलनाडु ने उपभोक्ताओं को लाभ दिया। उसी क्रम में उप्र की बिजली कम्पनियों ने उदय का अनुबन्ध करने के बाद उपभोक्ताओं को फायदा देने में हीलाहवाली करती रही।

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