जिला प्रशासन की त्वरित कार्यवाही से बच सकी जान...बिजनौर: नदी में बहे 18 मजदूरों को सुरक्षित बचाया

जिला प्रशासन की त्वरित कार्यवाही से बच सकी जान...बिजनौर: नदी में बहे 18 मजदूरों को सुरक्षित बचाया

बिजनौर। बिजनौर जिले की सीमा से सटे कोटद्वार-नजीबाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग-119 पर अचानक खूसरो नदी के तेज बहाव में 18 मजदूर बह गये, जिन्हें सुरक्षित बचा लिया गया है। जिलाधिकारी कुमार अटल रॉय ने बताया कि ये सभी मजदूर मजदूरी के लिए नदी पार करके जंगल जाते हैं, लेकिन अचानक नदी में पानी आने के कारण 18 मजदूर फंस गए। जैसे ही मजदूरों के फंसे होने की सूचना नजीबाबाद के उपजिलाधिकारी को मिली तो वह खुद सूखरो नदी पर पहुंचे और रस्सी के जरिए रेस्क्यू ऑपरेशन कर सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला। कुछ देर बाद वह स्वयं पुलिस अधीक्षक उमेश कुमार सिंह के साथ मौके पर पहुंच गये। उन्होंने बताया कि नदी में फंसे सभी मजदूरों को सकुशल निकालकर उनके घर भेज दिया। पिछले कई दिनों से पहाड़ों पर लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते सुखरो नदी से गुजर रहे नेशनल हाईवे-119 पर बने पुल के पास लगातार कटान हो रहा था। कटान के कारण कोटद्वार-नजीबाबाद के बीच सुखरो नदी के उफान से पुल और राष्ट्रीय राजमार्ग को खतरा पैदा हो गया है, जिससे जिला प्रशासन बिजनौर ने राष्ट्रीय राज मार्ग प्राधिकरण को इस दिशा में सचेत करते हुए पुल की सुरक्षा को तेज पानी के बहाव से बचाने के लिए किनारों पर रेत और मिट्टी से भरे कट्टे लगाए थे, जो पानी के तेज बहाव के आगे नाकाफी साबित हो गये। एक बार लगने लगा कि पुल कभी भी भरभराकर ढह सकता है। इसके पहले नजीबाबाद-कोटद्वार मार्ग पर 22 जुलाई 2०16 को सुखरो नदी में आए उफान के कारण रेलवे का पुल बह गया था। इस दौरान एनएच पर पुल का कुछ हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हुआ था और हाईवे भी कई स्थान पर धंस गया था। इसके बाद भी अधिकारियों ने पुल के पास सड़क पर सुरक्षा दीवार नहीं बनाई। बिजनौर के जिलाधिकारी ने इस बाबत उत्तराखंड के प्रशासनिक अधिकारियों से भी विचार-विमर्श किया था। कोटद्वार के उपजिलाधिकारी कमलेश मेहता ने बताया था कि मामला संज्ञान में है और एनएच के अधिकारियों से लगातार बातचीत की जा रही है। पहाड़ों पर हो रही बारिश से जहां लोगों का जीना मुहाल है। वहीं बिजनौर में गंगा नदी के अलावा इसकी सहायक नदियां मालन, नाचन और अन्य नदियों ने जिले में कई जगहों पर अपना कहर बरपा रखा है। जहां एक तरफ नदियों के बढ़ते जलस्तर को लेकर जिला प्रशासन के अधिकारी गंगा से सटे मकानों को खाली कराके लोगों को सुरक्षित जगह जाने के लिये कह रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ किसानों की फसल इस बाढ़ के पानी में समा गई है। बाढ़ के पानी से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बिजनौर के बढ़ापुर नगीना मार्ग पर पानी आ जाने से अब राहगीरों को सड़क से गुजरने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोग अपनी जान जोखिम में डालकर सड़क पार करने को मजबूर हैं। पानी का बहाव सड़क पर इतना तेज है कि कोई भी बड़ा हादसा किसी भी समय हो सकता है। लगातार बढ़ रहे पानी से बिजनौर जिले के कई जगहों पर बाढ़ के हालात बने हुए हैं। गंगा किनारे बसे ग्रामीण अपना घर और खेती छोड़कर सुरक्षित स्थान पर जाने को मजबूर हैं। पशुओं के चारे के लिए किसानों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। पशुओं का चारा पानी में डूबा हुआ है। अगर जल्द ही पहाड़ों पर हो रही बारिश नहीं रुकी तो हालात बिगड़ सकते हैं। गौरतलब है कि गत शुक्रवार को गंगा नदी में नाव पलटने से 27 लोग बह गए थे, जिनमें से 17 लोगों को बचा लिया गया। अभी तक दो महिलाओं की लाश बरामद हुई है। वहीं आठ लोग अब भी लापता बताये जा रहे हैं। एनडीआरएफ की टीम और पीएसी सहित स्थानीय पुलिस लापता लोगों की तलाश कर रही है। रविवार को वायु सेना के हेलिकाप्टर से जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। लापता लोगों की तलाश जारी है, लेकिन प्रशासन को कोई सफलता हाथ नहीं लगी। इससे पहले यहां एक तेल का टैंकर भी एक नदी में बह गया था।

Share it
Top