किसानों से गन्ना उत्पादन कम करने की अपील

किसानों से गन्ना उत्पादन कम करने की अपील

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2०17-18 में अत्यधिक गन्ना उत्पादन को देखते हुए निजी चीनी मिल मालिकों ने प्रदेश के किसानों से वर्ष 2०18-19 के लिए और अधिक गन्ना बुआई रोकने तथा फसल क्षेत्र को कम किये जाने का आग्रह किया है।
आधिकारिक सूत्रों ने आज यहां बताया कि चीनी उद्योगों ने गन्ना विकास में भी निवेश करना बंद कर दिया है, जहां वे गन्ना बीज, कीटनाशक और अन्य कृषि सामान गन्ना उत्पादकों को सब्सिडी दरों पर देते थे। उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती सबसे लोकप्रिय नकदी फसल है। वर्ष 2०17-18 सीजन में गन्ना उत्पाद क्षेत्र में 12.5 फीसदी की वृद्धि हुई है। प्रदेश में गन्ने की खेती 2०.54 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 23 लाख हेक्टेयर हो गई है। चीनी उद्योग हर साल सरकार द्वारा आवंटित मिल के 16 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का गन्ना पिराई के लिये लेते है। पेराई सीजन में उद्योगों को अपने अपने क्षेत्र से गन्ना की आपूर्ति की जाती है। निजी चीनी मिल किसानों से सीधे सम्पर्क कर गन्ना लेते है और उन्हें सभी साधन उपलब्ध कराते है। इस बीच प्रदेश में किसानों की गन्ना बकाया राशि 12 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। लगभग 4० प्रतिशत मिलों में अभी भी पेराई का काम चल रहा है। हाल ही में, पीलीभीत की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि गन्ना किसानों ने केंद्रीय मंत्री और स्थानीय भाजपा सांसद मेनका गांधी के समक्ष अपनी समस्याओं को उठाया था। उन्होंने किसानों से पूछा कि चीनी की कीमत नीचे जा रही है फिर भी वे क्यों बोते है। उन्होंने कहा था कि आप किसी भी अन्य फसल की खेती कर सकते हैं क्योंकि मांग कम हो रही है, जबकि चीनी का उत्पादन बहुत अधिक है।

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