यूपी: उर्दू अनुवादकों की नियुक्ति को लेकर संशय....प्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त ने दिये जांच के आदेश

यूपी: उर्दू अनुवादकों की नियुक्ति को लेकर संशय....प्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त ने दिये जांच के आदेश

लखनऊ। सूचना के अधिकार कानून के तहत मांगी गई जानकारी में खुलासा हुआ है कि उत्तर प्रदेश में 21 वर्षों से जिलों में उर्दू अनुवादक के पदों पर नियुक्ति नहीं हुई है।
राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने बताया कि उर्दू अनुवादक एवं अध्यापक की नियुक्ति को लेकर सूचना आयोग में कई शिकायतें आयी हैं, जिसमें से शामली, सम्भल, बिजनौर, मुरादाबाद आदि के आवेदन आये। एक अन्य प्रकरण में रामपुर निवासी सै. जफर अली ने बीएसए मुरादाबाद से जानकारी मांगी थी कि जिले में उर्दू अनुवादक एवं शिक्षक की कितनी नियुक्ति की गई, मगर विभाग द्वारा वादी को कोई सूचना उपलब्ध नहीं करायी गयी। नियम के तहत प्रार्थीगणों ने राज्य सूचना आयोग में आवेदन देकर सम्बन्धित प्रकरण की जानकारी मांगी थी। श्री उस्मान ने बताया कि मांगी गई सूचनाओं के अनुसार लगभग 41 विभागों में उर्दू अनुवादकों की नियुक्ति होनी थी, जिसका शासनादेश 2० अगस्त, 1994 में ही जारी हो गया था, जिसमें कहा गया था कि उत्तर प्रदेश के समस्त जिलों के सभी विभागों और कार्यालयों में उर्दू अनुवादकों की नियुक्ति की जाए। समस्त जिलों में उर्दू अनुवादकों की नियुक्ति 41 विभागों सहित सभी तहसीलों, ब्लाकों और थानों पर भी होनी थी। ये नियुक्ति समस्त जिलों में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा की जानी थी। इस सम्बन्ध में कार्मिक विभाग द्वारा शासनादेश जारी कर सभी मण्डलायुक्तों और समस्त जिलाधिकारियों को उर्दू अनुवादकों के पदों पर भर्ती का शासनादेश जारी किया था, लेकिन शासनादेश का पालन समस्त जिलाधिकारियों द्वारा अभी तक नहीं किया है। उन्होंने बताया कि सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी एवं बीएसए मुरादाबाद, सम्भल, बिजनौर, शामली के प्रतिनिधि उपस्थित हुए, उनके द्वारा प्रकरण के सम्बन्ध में अवगत कराया गया है कि 27 उर्दू अध्यापक और अनुवादक की नियुक्ति उर्दू अध्यापकों के पद पर की गयी है तथा नियुक्त शिक्षकों/शिक्षिकाओं के विद्यालयों के नाम नोटिस बोर्ड पर चस्पा किये गये हैं तथा अन्य वादों में भी वादी द्वारा मांगी गई जानकारी से खुलासा हुआ है कि मुरादाबाद 77, सम्भल 35, बिजनौर 87 कुल 226 उर्दू अध्यापक/अनुवादक की नियुक्ति उर्दू अध्यापकों के पद पर की गयी है, इस आशय की जानकारी प्रतिवादी ने आयोग को दी है। राज्य सूचना आयुक्त ने दोनो पक्षों की बहस सुनी और मामले को गम्भीरता से लेते हुए, सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्रकरण में जांच आरम्भ कर दी है। उन्होंने मुरादाबाद और सहारनपुर के मण्डलायुक्त, वादी/प्रतिवादी दोनों के बयान कलमबन्द करते हुए, जांच से सम्बन्धित सभी अभिलेख अगले 3० के अन्दर आयोग के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है।

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