कोल्ड स्टोरेज में रखकर कालाबाजारी कर रहे आलू कारोबारी, नागरिक परेशान

कोल्ड स्टोरेज में रखकर कालाबाजारी कर रहे आलू कारोबारी, नागरिक परेशान


लखनऊ। लखनऊ में आलू का भाव लगातार सातवें महीने में जस का तस बना हुआ है। आलू के रेट में गिरावट नहीं आयी है। आलू के बड़े कारोबारी कोल्ड स्टोरेज में आलू की बोरियां रखकर कालाबाजारी कर रहें है। जिससे आम नागरिक परेशान है।

नवीन मंडी में दो वर्ष पहले तक आलू की हजारों बोरियां गिरा करती थी। अब आलू लादे बैलगाड़ी से आते किसान नहीं दिखलाई पड़ते। आलू की पैदावार होने के बाद भी किसान मंडी नहीं आ रहा है। जिसका कारण उससे मिट्टी से निकलते ही आलू खरीदने वाले कारोबारी है। कारोबारी किसान से आलू की बोरियां खरीदने के बाद सीधे कोल्ड स्टोरेज में रखता है। फिर दिन दोगुने रात चार गुने मूल्य पर उसे बेचता है।

लखनऊ में आलू का रेट बीस रुपये में देढ़ किलो से कम नहीं हो सका है। आखिरी छह माह में एक बार ही आलू का रेट 10 रुपये किलो हुआ था। फिर आलू ने अपना रेट कम नहीं होने दिया। आलू जिसकी सब्जियों में सबसे ज्यादा खपत होती है, उसके रेट में कमी ना आने के कारण से आम नागरिक और ठेला दुकानदार तक बेहद परेशानी झेल रहें है।

मंडी में सब्जी कारोबारी संतोष ने बताया कि टमाटर, प्याज और लौकी बेचकर वे पिछले छह माह से धंधा कर रहें है। प्याज से ही कुछ मुनाफा हो रहा है। मंडी में आलू आ नहीं रहा है, जो भी आलू है वो सभी पुरानी बोरियां हैं।

उन्होंने बताया कि आलू को खरीदने में मुनाफा नहीं है। दूसरे कारोबारी से खरीदकर बेचने में नुकसान बहुत है। आलू की बोरियां कभी पचास रुपये में लेते थे। अब जो बोरियां मिल रही है वो 300 रुपये तक पहुंच चुकी है। तीन रुपये से चार रुपये किलो का आलू अभी 12 से 15 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है।

ठेला सब्जी दुकानदार लक्ष्मी ने कहा कि सीतापुर, हरदोई और फैजाबाद रोड पर कोल्ड स्टोरेज में आलू की बोरियां भरी पड़ी है। जो सभी बोरियां बाजार में आ जाये तो आलू का रेट पांच रुपये किलो तक आ जायेगा। कोल्ड स्टोरेज में रखा आलू पूरे साल बिक रहा है। जो किसान मंडी में आलू लाता था, वो अब सीधे कारोबारी को आलू बेचकर बड़ा मुनाफा एक मुश्त दाम पाना चाहता है।

बता दें कि नवीन मंडी में सब्जी कारोबारियों ने मंडी सचिव से लेकर निदेशक तक कालाबाजारी को लेकर शिकायतें की है। शिकायतों को करने के बाद कागजी कार्यवाही भी होती रही है लेकिन कभी छापेमारी नहीं हुई है।


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