आगरा में उत्तर प्रदेश बार कौसिंल की अध्यक्ष की गोली मार कर हत्या

आगरा में उत्तर प्रदेश बार कौसिंल की अध्यक्ष की गोली मार कर हत्या

आगरा उत्तर प्रदेश में आगरा के न्यू आगरा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश बार कौंसिल की नवनिर्वाचित अध्यक्ष सुश्री दरवेश सिंह की बुधवार को उसके साथी वकील मनीष बाबू शर्मा ने गोली मार कर हत्या कर दी। पुलिस अधीक्षक (सिटी) प्रशांत वर्मा ने यहां यह जानकारी दी। उनहोंने बताया कि दीवानी कचहरी परिसर में 35 वर्षीय सुश्री दरवेश सिंह के उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की अध्‍यक्ष चुने जाने की खुशी में उसके साथी अधिवक्ताओं द्वारा स्वागत समारोह आयोजित किया गया । वकीलों ने विजय जुलूस निकाला और दोपहर दो बजे के बाद खुशियां मनाकर लौटने के बाद सुश्री यादव अधिवक्ता अरविंद मिश्रा के चैंबर में गई थी। उस दौरान साथी अधिवक्‍ता मनीष शर्मा से किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। बात बढ़ने पर मनीष ने अपनी लाइसेंसी रिवाल्वर से दरवेश यादव को गोली मार दी और इसके बाद उसने खुद को भी गोली मार ली। उन्होंने बताया कि फायरिंग से दीवानी परिसर में अफरा-तफरी फैल गई। दरवेश को तत्काल पुष्पांजलि अस्पताल ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इधर, मनीष शर्मा को लोटस अस्पताल में उपचार के लिए ले जाया गया। उन्हाेंने बताया कि मनीष शर्मा की हालत गंभीर देखते हुए डाक्ट्ररों ने उसे बाद में मेदांता अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के चुनाव में अध्यक्ष पद का चुनाव जीतकर सुश्री दरवेश यादव ने वकीलों की राजनीति में एक बड़ा मुकाम बनाया था। दो दिन पहले ही उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की वह अध्यक्ष निर्वाचित हुई थीं। यूपी बार काउंसिल के इतिहास में वह पहली महिला अध्यक्ष बनी थीं। काउंसिल के प्रयागराज में हुए चुनाव में दरवेश यादव और हरिशंकर सिंह को बराबर 12-12 वोट मिले। दरवेश यादव के नाम एक रिकॉर्ड यह भी था कि बार काउंसिल के 24 सदस्यों में वह अकेली महिला थीं। बार चुनाव मैदान में कुल 298 प्रत्याशी थे। दरवेश सिंह मूल रूप से एटा की रहने वाली थीं। रिटायर्ड पुलिस क्षेत्राधिकारी रामेश्वर की बड़ी पुत्री दरवेश वर्ष 2016 में बार काउंसिल की उपाध्यक्ष और 2017 में कार्यकारी अध्यक्ष भी चुनी गई थीं। वह पहली बार 2012 में सदस्य पद पर विजयी हुई थीं। तभी से बार काउंसिल में सक्रिय रहीं। उन्होंने आगरा कॉलेज से विधि स्नातक की डिग्री हासिल की। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (आगरा विश्वविद्यालय) से एलएलएम किया। उन्होंने 2004 में वकालत शुरू की। उसके हमलावर मनीष शर्मा के साथ घनिष्ठ रिश्ते थे।

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