अलीगढ़ में तनाव, इंटरनेट बंद...पुलिस कार्यवाही से योगी असंतुष्ट, अफसरों को लगाई फटकार

अलीगढ़ में तनाव, इंटरनेट बंद...पुलिस कार्यवाही से योगी असंतुष्ट, अफसरों को लगाई फटकार

अलीगढ़। उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाओं में बढोत्तरी को लेकर विपक्षी दलों के निशाने पर आये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को एक उच्च स्तरीय बैठक में अलीगढ़ में मासूम के साथ दंरिदगी के मामले में प्रगति की जानकारी ली और वारदात के कारण उपजे तनाव की समीक्षा की। इस बीच अलीगढ़ के टप्पल क्षेत्र में ढाई साल की मासूम की हत्या के बाद तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। हालात को काबू में करने के लिये केन्द्रीय बलों की तैनाती कर गई है। जिला प्रशासन ने अफवाहों से बचने के लिये इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक में श्री योगी ने घटना को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की और महिलाओं विशेषकर बच्चियों के साथ होने वाली आपराधिक वारदातों पर प्रभावी अंकुश लगाने के निर्देश दिये। श्री योगी अलीगढ घटना में की गई कार्रवाई से असंतुष्ट नजर आये और पुलिस की लापरवाही पर लताड़ लगाई। पुलिस महानिदेशक ओ.पी. सिंह ने बताया कि अलीगढ़ मामले में पुलिस ने कार्रवाई में तेजी दिखाई है। इस सिलसिले में पांच पुलिस कर्मियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। उन्होने कहा कि हम मामले को सुलझाने के लिये फोरेंसिक और डीएनए जांच की मदद ले रहे है। पीडितों को न्याय दिलाने के लिये मामले का फास्ट ट्रैक को दिया जायेगा। श्री सिंह ने कहा कि मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश करने वालों को बख्शा नहीं जायेगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य में अल्पसंख्यक पूरी तरह सुरक्षित हैं। टप्पल क्षेत्र में कुछ अल्पसंख्यक परिवारों के पलायन संबंधी रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस का काम राज्य की 23 करोड़ जनता की रक्षा करना है और इस मामले में कोई भेदभाव बरता नहीं जायेगा। इस बीच अलीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आकाश कुलहरि ने सोमवार को खैर के क्षेत्राधिकारी पंकज श्रीवास्तव का तबादला कर दिया। उनके स्थान पर संजीव कुमार दीक्षित को तैनात किया गया है। श्रीवास्तव पर मामले की जांच में ढिलायी बरतने का आरोप है। दूसरी ओर रविवार को टप्पल में महापंचायत बुलाये जाने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। क्षेत्र में बड़ी तादाद में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। पुलिस क्षेत्र के चप्पे चप्पे पर पैनी नजर बनाये हुए हैंै। सोशल मीडिया पर विशेष नजर रखी जा रही है। अलीगढ़ में बाजार आज खुले रहे, लेकिन असामाजिक तत्वों के मामले को सांप्रदायिक रंग देने के प्रयास के चलते पूरे जिले में तनाव व्याप्त है। प्रशासन ने जिले में निषेधाज्ञा लागू कर दी है। प्रशासन की पीडित परिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलवाने की कोशिश बेकार साबित हुई। पीडि़ति परिवार का कहना था कि यदि मुख्यमंत्री उनसे मिलने के इच्छुक हैं, तो उन्हें अलीगढ़ आना चाहिये। घटना के विरोध में राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के धरना प्रदर्शन का क्रम आज भी जारी रहा। वे घटना के आरोपियों को मृत्यु दंड देने की मांग कर रहे हैं। जनता के आक्रोश को देखते हुये पुलिस बैकफुट पर है और आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र जल्द प्रेषित किये जाने की संभावना है। पुलिस को फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है जिसके जरिये पता चलेगा कि हत्या से पहले मासूम के साथ बलात्कार हुआ था कि नहीं। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई थी। पुलिस के अनुसार पीडित 3० मई को लापता हुई थी, जबकि उसका क्षत विक्षत शव दो जून को उनके घर से महज 1०० मीटर की दूरी पर मिला। शव कपड़े से लिपटा हुआ था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई। बालिका के पिता ने जाहिद पर आरोप मढा था। उनका कहना था कि आरोपी ने उनसे पांच हजार रूपये का कर्ज लिया था, जिसे मांगने पर उसने वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने इस सिलसिले में जाहिर और बालिका के पडोसी असलम को चार जून को गिरफ्तार किया था। दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया था। बाद में असलम की पत्नी समेत तीन अन्य को पुलिस ने गिरफ्तार किया। इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में इंस्पेक्टर कुशपाल सिंह चाहल, उप निरीक्षक सत्यवीर सिंह, अरविंद कुमार और शमीम अहमद के अलावा कांस्टेबल राहुल यादव को निलंबित कर दिया गया। उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिये विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है जो अपनी रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर सौंपेगी। आरोपियों के खिलाफ पाक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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