चित्रकूट में बर्निंग ट्रेन बनने से बची पवन एक्सप्रेस

चित्रकूट में बर्निंग ट्रेन बनने से बची पवन एक्सप्रेस


-यत्रियों की नजर पड़ने पर रोकी गई ट्रेन, आग को बुझाया

चित्रकूट। लोकमान्य तिलक टर्मिनल मुंबई से बिहार के दरभंगा जा रही पवन एक्सप्रेस रविवार को मुंबई-हावड़ा रेलमार्ग पर कटैया डांडी तथा बरगढ़ रेलवे स्टेशन के बीच 'बर्निंग ट्रेन' बनने से बच गई। ब्रेक बाइंडिंग में लगी आग ट्रेन के एस-3 कोच तक पहुंच गई थी। यात्रियों की निगाह पड़ने पर ट्रेन को रोककर आग बुझाई गई। बरगढ़ स्टेशन मास्टर और तकनीकी स्टाफ के प्रयास से आग पर काबू पाया जा सका, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

जानकारी के मुताबिक मुंबई से दरभंगा बिहार जाने वाली पवन एक्सप्रेस रविवार की सुबह लगभग पौने चार बजे जबलपुर से चली थी। करीब साढे़ नौ बजे ट्रेन कटैया डांडी रेलवे स्टेशन से आगे बढ़ी तभी एस-3 बोगी में ब्रेक शू के पास से धुआं उठने लगा और कुछ देर में आग फैल गई। लपटें उठती देख ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों में हड़कंप मच गया। उन्होंने आनन-फानन में चेन पुलिंग कर दी। ट्रेन चित्रकूट जिले के बरगढ़ रेलवे स्टेशन पर रुक गई। ट्रेन के धीमे होते ही हलकान यात्री चलती गाड़ी से जान बचाने को नीचे कूदने लगे। महिलाओं और बच्चों का बहुत बुरा हाल था। अन्य यात्रियों ट्रेन से कूदते देख बच्चे रोने लगे। इससे उनके माता-पिता और ज्यादा परेशान हो रहे थे। लेकिन रेल अधिकारियों के वहां आने पर उन्हें चैन मिला।

ट्रेन के स्टेशन पर पहुंचते ही स्टेशन मास्टर और तकनीकी स्टाफ अग्निशमन यंत्रों के साथ ट्रेन के पास पहुंचा और कोच में लगी आग को फटाफट बुझाया, तब जाकर यात्रियों ने राहत की सांस ली। बरगढ़ के स्टेशन मास्टर अरुण कुमार तिवारी ने बताया कि जबलपुर में चेकिंग के बाद ट्रेन आगे बढ़ाई गई। ब्रेक शू में आयी समस्या को आग लगने का कारण माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि आग बुझाने एवं चेकिंग के बाद ट्रेन को आगे के लिए रवाना कर दिया गया है।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यात्रियों की सजगता से पवन एक्सप्रेस बर्निंग ट्रेन बनने से बच गई और बड़ा हादसा होने से बच गया। ट्रेन के गार्ड या चालक को आग लगने की जानकारी ट्रेन के रुकने पर हुई। इससे एक बार फिर रेलवे प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। सूत्रों के मुताबिक चित्रकूट जिले के कटैया डांडी रेलवे स्टेशन के पास ब्रेक शू के पास आग लगने के दौरान ट्रेन 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार में थी। मानिकपुर जंक्शन चित्रकूट से ट्रेन चलने के बाद अगला स्टापेज नैनी प्रयागराज में था। इस दौरान यात्रियों की निगाह नहीं पड़ती तो बड़ा हादसा तय था।


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