गोरखपुर-बस्ती मण्डल में भाजपा और कांग्रेस ने अभी नहीं खोले पत्ते

गोरखपुर-बस्ती मण्डल में भाजपा और कांग्रेस ने अभी नहीं खोले पत्ते


गोरखपुर। गोरखपुर और बस्ती मण्डल की नौ लोकसभा सीटों पर 19 मई को मतदान होना है। मण्डल की सभी नौ सीटों पर 2014 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जीत दर्ज की थी लेकिन योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर का सांसद पद छोड़ने के बाद 2018 में हुये उपचुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) और क्षेत्रीय निषाद पार्टी गठबंधन ने इस सीट पर कब्जा कर लिया था। इस बार अभी तक इन सीटों के लिये भाजपा और कांग्रेस ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

गोरखपुर सीट की बात करें तो यहां 1990 के दशक में राम मंदिर आंदोलन की लहर के साथ ही गोरक्षनाथ मठ से जुड़ा व्यक्ति ही लोकसभा चुनाव जीतता रहा है। पहले मठ के प्रमुख महंत अवेद्यनाथ यहां से भाजपा के टिकट पर सांसद चुने जाते रहे। फिर योगी आदित्यनाथ पार्टी के सांसद बने। उप चुनाव में मठ से जुड़ा प्रत्याशी भाजपा ने नहीं उतारा था और इस बार भी चर्चा है कि अगर गोरक्षनाथ मठ से जुड़े व्यक्ति को भाजपा ने उम्मीदवार नहीं बनाया तो पार्टी को जीत के लिये लोहे के चने चबाने पड़ सकते हैं।

गोरखपुर और बस्ती मण्डल में अभी सिर्फ सपा और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) गठबंधन ने ही प्रत्याशियों का एलान किया है। भाजपा और कांग्रेस की ओर से कई नाम चर्चा में हैं, लेकिन दोनों पार्टियों ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

गोरखपुुर और प्रयागराज के फूलपुर में 2018 में हुये उप चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार पराजित हुये थे। ऐसे में पार्टी इस बार सतर्क है। उसने विपक्ष के वोट बैंक में सेंध भी लगानी शुरू कर दी है।

गोरखपुर और महराजगंज लोकसभा सीटें निषाद मतदाता बहुल हैं। इसे देखते हुये भाजपा ने प्रदेश के पूर्व मंत्री स्व. जमुना निषाद की पत्नी और सपा की पूर्व विधायक राजमती निषाद और उनके बेटे अमरेंद्र को पार्टी में शामिल कराया है।

चर्चा यह हो रही है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुश्री निषाद और उनके बेटे को भाजपा में शामिल कराने में बड़ी भूमिका निभायी है और अमरेंद्र को गोरखपुर से उम्मीदवार भी बनाया जा सकता है। ताकि हिंदुत्व और विकास के साथ जाति का लाभ भी भाजपा ले सके।

Share it
Top