विपक्ष की मांग को प्रदेश सरकार ने किया पूरी तरह खारिज....किसानों को मुफ्त बिजली नहीं देगी सरकार

विपक्ष की मांग को प्रदेश सरकार ने किया पूरी तरह खारिज....किसानों को मुफ्त बिजली नहीं देगी सरकार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य विधानसभा में शुक्रवार को किसानों को मुफ्त बिजली मुहैया कराने की विपक्ष की मांग को सिरे से खारिज कर दिया। सूबे के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने सदन को सूचित किया कि बिजली की आपूर्ति रोस्टर सिस्टम के अनुसार हो रही है और गांवों को कम से कम 18 घंटे बिजली दी जा रही है। मंत्री ने दावा किया कि राज्य में बिजली की मांग 11 हजार से 14 हजार 500 मेगावाट के बीच रहती है, जबकि सरकार ने हर रोज औसतन 14250 मेगावाट बिजली की व्यवस्था की है। उन्होने कहा 'हम बगैर किसी भेदभाव के सभी जिलों को बिजली आपूर्ति कर रहे है। ग्रामीण क्षेत्रों को कम से कम 18 घंटे की बिजली दी जा रही है। मंत्री ने लिखित बयान में कहा कि तापीय संयंत्रो से 38०० मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है जबकि 4500 मेगावाट बिजली का आयात किया जा रहा है। इसके अलावा 4०० मेगावाट बिजली सौर ऊर्जा संयंत्रों से मिल रही है और 9०० मेगावाट बिजली चीनी मिलों के सह उत्पादन से प्राप्त हो रही है। श्री शर्मा ने कहा कि 2०17-18 में नवम्बर तक 119051.44 मिलियन यूनिट की खरीद की, जबकि सरकार ने अब तक विभिन्न श्रोतों से 82825.55 मिलियन यूनिट बिजली की खरीद की है। मंत्री ने इस तथ्य से इंकार किया कि बिजली के बकाये की अदायगी ना करने पर प्राथमिकी दर्ज करने की बात से इंकार करते हुए कहा कि कानून के मुताबिक अवैध बिजली कनेक्शन अथवा बिजली चोरी के मामलों में ही एफआईआर दर्ज करने का प्रावधान है। सपा सदस्यों के नये ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण के बारे में पूछे सवाल पर बिजली मंत्री ने कहा कि सरकारे आती है और जाती है, लेकिन परियोजनाये यथावत रहती है। उन्होने कहा कि एक ऊर्जा संयंत्र के निर्माण को पूरा होने में पांच से छह साल का समय लगता है और मौजूदा सरकार पिछली सरकारों के सभी अर्धनिर्मित बिजली परियोजनाओं को पूरा करने में जुटी है।

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