ठगी करने वाले तीन गिरफ्तार...बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से चैक क्लोनिंग कर करते थे ठगी

ठगी करने वाले तीन गिरफ्तार...बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से चैक क्लोनिंग कर करते थे ठगी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) कानपुर के फजलगंज क्षेत्र से बैंककर्मियों से सांठगांठ कर चेक क्लोनिंग कर ठगी करने वाले गिरोह का भण्डा फोड़ करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें बैंककर्मी भी शामिल हैं। एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह ने बताया की सूचना मिलने पर कानपुर के फजलगंज इलाके से चैक क्लोनिंग कर ठगी करने वाले गिरोह के तीन सदस्यों मिर्जापुर निवासी बैंककर्मी अजय सिंह यादव कानपुर निवासी आदित्य शुक्ला और लखनऊ निवासी जगदीप मिश्रा उर्फ राजू को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि पकड़े गये लोगों के पास से 14,8०,००० रूपये, स्टेट बैंक और सेन्टंल बैंक के प्रयोग शुदा 159 चेक 1०1 आधार कार्ड, 239 पहचान पत्रों की छायाप्रति, अलग-अलग बैंकों की 44 चेक बुक, 37 विभिन्न बैंको के खाली चेकों की सीट, 14 मोहर, दो स्टाम्प पैड, लैपटॉप, प्रिन्टर, सात मोबाइल फोन के सिम कार्ड, अवैध पिस्टल, छह कारतूसों के अलावा चेक क्लोनिंग के लिए स्टेशनरी का सामान बरामद किया गया। श्री सिंह ने बताया कि पिछले काफी समय से बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों में भिन्न-भिन्न प्रकार से अपराध किये जाने तथा खातों से पैसा निकालने के संबंध में सूचना मिल रही थी। इन घटनाओं से बैंकों के प्रति आम लोगों को विश्वास में कमी आ रही थी। उन्होंने बताया कि इस गिरोह में कुछ बैंककर्मी भी शामिल हैं। इन लोगों को पकडऩे के लिए बैंक अधिकारियों ने एसटीएफ से अनुरोध किया था। उन्होंने बताया कि गिरोह को पकडऩे के लिए एसटीएफ के पुलिस उपाधीक्षक सत्यसेन यादव ने चेक क्लोनिंग करने वाले एक गिरोह के सम्बंध में अभिसूचना एकत्र करने का कार्य आरम्भ किया। सूचना संकलन के दौरान जानकारी हुई की रिजर्व बैंक ने एक अगस्त 2०13 से चेक भुगतान के लिए उनका भौतिक आवागमन न होकर चेक की डिजिटल इमेज क्लियरेंस के लिए भेजी जाने लगी। दूसरे शब्दों में पेपर चेक भुगतान करने वाले बैंक तक ना जाकर एक स्थान पर रोक दिया जाता और उसके आगे इमेज के आधार पर ही भुगतान की स्वीकृति प्रदान की जाती। श्री सिंह ने बताया कि इससे चैक के क्लियरेंस की लागत घट गई, साथ ही साथ पास किये गये चेकों का डाटा रखना और जरुरत पडऩे पर उनका विवरण प्राप्त करना आसान हो गया। लेकिन अपराधियों ने इस सिस्टम में एक बड़ी कमी निकाल डाली जब चेक फिजिकली जाया करते थे, तो बैंक के अनुभवी कर्मी चेक के कागज को छूकर उसकी विश्वसनीयता का आंकलन कर लेते थे। क्लियरेंस के लिए डिजिटल इमेज भेजे जाने की व्यवस्था में यह सम्भावना स्वत: समाप्त हो गयी। अब धोखेबाजों को खाता संख्या, खाता धारक का नाम, उसका प्रचलित चेक नम्बर, खाते में उपलब्ध धनराशि की जानकारी होने पर उस खाते के साथ फ्राड करना सम्भव हो गया। उन्होंने बताया कि अभिसूचना संकलन के दौरान जानकारी मिली कि इन फर्जीवाड़ो के सम्बन्ध में कानुपर के स्वरूप नगर, गोविन्दनगर, फीलखाना, फजलगंज, कल्याणपुर तथा हमीरपुर जिले के राठ थाने पर मामले दर्ज हैं। उन्होंने बताया कि निरीक्षक राजेश चन्द्र त्रिपाठी और उप निरीक्षक ज्ञानेन्द्र कुमार राय ने हमीरपुर के राठ थाने में दर्ज मामले में अजय सिंह यादव को गिरफ्तार किया, जो कि हमीरपुर में भारतीय स्टेट बैंक की बसेला शाखा बसेला में सहायक के पद पर नियुक्त है। श्री सिंह ने बताया कि गिरफ्तार किए गये अजय ने पूछताछ में बताया कि इस गिरोह का मुख्य सरगना कानपुर निवासी उसके बचपन को दोस्त आदित्य शुक्ला है। वही विभिन्न खाता धारकों के खातों में जमा धनराशि की जानकारी एवं अन्तिम भुगतान चेक की सिरीज संख्या इसको दी जाती थी। उसके बाद यह उन खाताधाराकों के फर्जी चेेक (क्लोन) तैयार कर उन खातों से धनराशि निकलवाता था। उन्होंने बताया कि अजय की पूछताछ के बाद एसटीएफ ने आदित्य शुक्ला को उसके एक साथी जगदीप मिश्रा के साथ गिरफ्तार किया गया, जिनसे उपरोक्त बरामदगी की गयी। आदित्य शुक्ला ने पूछताछ पर बताया कि अजय यादव और प्रेम बाजपेयी जो कि स्टेट बैंक और बैंक आफ बडौदा के कर्मचारी हैं तथा कानपुर निवासी अखिलेश तिवारी, पटना (बिहार) निवासी विकास और लखनऊ के माल निवासी जगदीप मिश्रा और रिन्कू अवस्थी उसके गिरोह के सक्रिय सदस्य हैं। गिरोह लोग बैंक कर्मियों की सहायता से यह फर्जीवाड़े के कार्य को अंजाम देते थे। श्री सिंह ने बताया कि अजय गोपाल बाबू नाम के पोस्टमैन से विभिन्न बैंको द्वारा भेजे जाने वाले चेक बुकों को पैसा देकर के प्राप्त कर लेता था। इसी प्रकार प्रेम बाजपेयी,जो कि बैंक आफ बड़ौदा, गोविन्द नगर कानपुर में कार्यरत है, से क्लीयर चेकों को प्राप्त कर लेता था। इन क्लीयर्ड चेकों पर खाताधारक का खाता नम्बर, खाताधारक का नाम और हस्ताक्षर अंकित रहता था। उन्होंने बताया कि इस सूचना को बैंककर्मी अजय यादव से साझा कर वर्तमान में खाते में उपलब्ध धनराशि तथा उक्त खाते के अन्तिम भुगतान चेकों की सीरीज तथा खाता धारक का मोबाइल नम्बर उपलब्ध है कि नहीं, की जानकारी प्राप्त कर उसके पास पूर्व से उपलब्ध ब्लैंक चेकों से खाता नम्बर, धारक का नाम और चेक की सीरीज को ब्लैड आदि की सहायता से बडी ही सावधानी पूर्वक हटा दिया जाता है तथा उस खाली स्थान पर लैपटाप एवं प्रिन्टर की मदद से जिन खाता धारकों की धनराशि निकालनी होती है उनके खाता नम्बर तथा उस खाता धारक का नाम और आगे की चेक नम्बर की सीरीज चेक पर प्रिन्ट कर दी जाती है। रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

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