भारत बंद भाजपा का षडयंत्र...मायावती ने कहा- उकसावे में नहीं आयें वंचित और पिछड़े

भारत बंद भाजपा का षडयंत्र...मायावती ने कहा- उकसावे में नहीं आयें वंचित और पिछड़े

लखनऊ। अनुसूचित जाति/जनजाति संशोधन विधेयक के विरोध में सवर्ण समाज के गुरूवार को 'भारत बंद को भारतीय जनता पार्टी का चुनावी षडयंत्र करार देते हुए बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने वंचितों और पिछडों को उकसावे में नहीं आने की अपील की और कहा कि गलत आर्थिक नीतियों के कारण जनाधार खो चुकी भाजपा जनता के ज्वलन्त मुद्दों से ध्यान भटकाने की फिराक में इस तरह के हथकंडे अपना रही है।

सुश्री मायावती ने शुक्रवार को यहां पत्रकारों से कहा कि भाजपा शासित राज्यों में वंचितों और आदिवासियों के सम्मान एवं स्वाभिमान से जुड़े एससी/एसटी कानून की बहाली के खिलाफ कुछ संगठनों ने कल 'भारत बन्द कर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि बसपा इस तर्क से इत्तफाक नहीं रखती कि इस कानून की बहाली से सवर्ण समाज के लोगों का शोषण और उत्पीडऩ होगा। कानून का दुरूपयोग होना अथवा ना होना, यह सब कुछ केन्द्र और राज्य सरकारों की अनुसचित जाति/जनजाति वर्गों के प्रति उनकी सही एवं ईमानदार सोच, नीति, नियत और कार्यप्रणाली पर निर्भर करता है। बसपा अध्यक्ष ने कहा कि इस सबूत है कि बसपा के कार्यकाल में इस कानून का बिल्कुल भी दुरूपयोग नहीं होने दिया गया था। हालांकि इसके दुरूपयोग करने को लेकर जो भी मामले मेरी सरकार के सामने आये थे, वे मामले ज्यादातर पिछली रही सरकारों के समय के ही थे। जिनकी मेरी सरकार में पूरे ठीक ढंग से जाँच-पड़ताल कराके किसी के साथ भी अन्याय नहीं होने दिया गया था। बसपा प्रमुख ने कहा कि बसपा सर्वसमाज के हित का ध्यान रखने वाली पार्टी है और इसीलिये देश में सबसे पहले अगणी जाति के गरीबों को आर्थिक आधार पर आरक्षण देने के लिये केन्द्र सरकार को चि_ी लिखी तथा संसद के भीतर और बाहर भी लगातार इसके लिये संघर्ष करती रही हैं। साथ ही, उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकार के दौरान सामान्य वर्गो की सरकारी नौकरी में बहाली पर लगी रोक को हटाकर इनको स्थाई रोजगार दिलाये गये थे। सुश्री मायावती ने आरोप लगाया कि एससी/एसटी कानून की आड़ में सत्ताधारी भाजपा और इनके पैतृक संगठन आरएसएस घिनौनी राजनीति कर रहे हैं, जिनके इशारे पर कल भारत बंद का आयोजन किया गया। इसकी आड़ में भाजपा सरकार जनता के असली और ज्वलन्त मुद्दों से ध्यान बांटने का असफल प्रयास कर रही है। इस बात का सबसे बड़ा सबूत यह है कि कल बन्द का ज्यादातर असर हमें उन्हीं राज्यों में देखने के लिये मिला है जिन राज्यों में भाजपा की अकेले या फिर इनके सहयोगी दलों की मिली-जुली सरकारें चल रही हैं। उन्होंने कहा कि यह बात जग-जाहिर हो चुकी है कि इनकी सरकारों की गलत आर्थिक नीतियों और कार्यशैली की वजह से देश में सर्वसमाज में गरीबी, बेरोजगारी और महंगाई काफी ज्यादा बढी है। काफी अपरिपक्व तरीके से लागू किये गये नोटबन्दी और जी.एस.टी. की जबरदस्त मार जनता झेलने को मजबूर है।

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