देश में हर वर्ष 13.5 लाख लोगों की तंबाकू जनित बीमारियों से मौत

देश में हर वर्ष 13.5 लाख लोगों की तंबाकू जनित बीमारियों से मौत

जयपुर। देश में तंबाकू जनित बीमारियों से हर वर्ष 13.5 लाख लोगों की मौत हो जाती है जबकि राजस्थान में इससे 77 हजार लोगों की मौत होती है। विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर टाटा मेमोरियल सेंटर के प्रमुख कैंसर सर्जन प्रोफेसर डॉ. पंकज चतुर्वेदी ने बताया कि भारत में तंबाकू जनित बीमारियों से हर साल 13.5 लाख लोगों की मौत होती है। जिसमें राजस्थान में 77 हजार लेाग बेमौत मर रहें है। इसमें तम्बाकू के कारण होने वाले कैंसर से दस प्रतिशत से अधिक लोग शामिल हैं। तम्बाकू, कैंसर होने का सबसे बड़ा कारण है। वर्तमान में 90 प्रतिशत मुंह और फेफड़े के कैंसर के साथ कई अन्य तरह के कैंसर को भी रोका जा सकता है, क्योंकि इनके होने का कारण तंबाकू है। उन्होंने कहा कि उनके लगभग नब्बे प्रतिशत मरीज तम्बाकू के उपयोगकर्ता एवं उपभोक्ता हैं। हमने पाया है कि धुआं रहित तम्बाकू सेवन करने वालों को कम उम्र में कैंसर हो जाता है और इनकी मृत्यु दर भी अधिक है। अधिकांश उपयोगकर्ता युवावस्था में तम्बाकू का सेवन आकर्षित करने विज्ञापन और प्रचार के चक्कर में आकर शुरू करते हैं। ऐसे युवाओं की मृत्यु बहुत कम उम्र में हो जाती है। उन्होंने युवाओं को बचाने के लिए गुटखा, खैनी, पान मसाला आदि के खिलाफ आंदोलन चलाने की जरुरत बताई। उन्होंने कहा कि भारत की समस्या धूम्रपान से अधिक चबाने वाले तंबाकू की है। ग्लोबल एडल्ट तंबाकू सर्वेक्षण, 2017 के अनुसार 10.7 प्रतिशत वयस्क भारतीय (15 वर्ष और उससे अधिक) धूम्रपान करते हैं, जबकि चबाने वाले तंबाकू का सेवन 21.4 प्रतिशत लोग करते हैं। इसमें सबसे अधिक त्रिपुरा में 48 प्रतिशत तथा सबसे कम केरल में 5.4 प्रतिशत लोग सेवन करते हैं।भारत में पान मसाला का विज्ञापन जारी हैं, जो इसी नाम के तंबाकू उत्पादों के लिए भी विपणन को प्रोत्साहन दे रहें हैं। सिगरेट और तम्बाकू उत्पाद अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार तंबाकू उत्पादों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष विज्ञापन प्रतिबंधित है। हेल्थ फाउंडेशन (एसएचएफ) के ट्रस्टी संजय सेठ ने कहा कि विभिन्न कार्यक्रमों और बड़े आयोजनों में पान मसाला के आकर्षित करने वाले विज्ञापन होते हैं जो तंबाकू उत्पादों के लिए सरोगेट हैं। उन्होंने कहा कि आक्रामक विज्ञापन से आकर्षित होने वाले बच्चों को बचाने के लिए राज्य सरकारों को इस संबंध में न्यायालय के फैसले को प्रभावी रूप से लागू करना चाहिए।

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