नागौर जिले में चार सीटों पर त्रिकोणात्मक एवं छह पर सीधा मुकाबला

नागौर जिले में चार सीटों पर त्रिकोणात्मक एवं छह पर सीधा मुकाबला


नागौर । राजस्थान विधानसभा चुनाव में नागौर जिले में निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) के कारण इस बार कई सीटों पर समीकरण बिगड़ने की संभावना से जिले की दस विधानसभा क्षेत्रों में से खींवसर, जायल, लाडनूं एवं मेड़ता सीटों पर सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एवं प्रमुख विपक्ष कांग्रेस के साथ त्रिकोणात्मक जबकि शेष छह सीटों पर भाजपा एवं कांग्रेस में सीधा मुकाबला होने के आसार हैं।

खींवसर से मौजदूा निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल एक महीने पहले ही अपनी पांचवीं रैली में रालोपा पार्टी का गठन किया था और इससे पहले नागौर, बाड़मेर, बीकानेर, सीकर में चार बड़ी रैलियां कर जो दबदबा दिखाया उससे भाजपा एवं कांग्रेस दोनों की नींद उड़ा दी थी। इन रैलियों के बाद श्री बेनीवाल ने खुद खींवसर के अलावा जिले में जायल, लाडनूं तथा मेड़ता से भी अपना उम्मीदवार चुनाव मैदान में उताकर मुकाबले को त्रिकोणात्मक बना दिया। रालोपा के राज्य में 58 प्रत्याशी विभिन्न जगहों से चुनाव लड़ रहे हैं।

खींवसर से बेनीवाल के सामने भाजपा ने रामचंद्र उत्ता तथा कांग्रेस ने सेवानिवृत्त अधिकारी सवाई सिंह चौधरी को चुनाव मैदान में उतारा हैं। खींवसर से श्री बेनीवाल वर्ष 2008 में भाजपा प्रत्याशी के रुप में चुनाव लड़ा और इसके बाद अगला चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रुप में लड़कर जीता। बेनीवाल खींवसर में अपना राजनीतिक प्रभुत्व जमा चुके हैं और वहां सभी वर्ग में वह काफी लोकप्रिय भी हैं। ऐसे में मुकाबला भले ही त्रिकोणात्मक बन गया हो लेकिन बेनीवाल की स्थिति मजबूत मानी जा रही हैं। बेनीवाल के पिता रामदेव भी मूंडवा से वर्ष 1977 एवं 1985 में दो बार विधायक रहे चुके हैं। परिसीमन के बाद मूंडवा की जगह खींवसर सीट ने जगह ले ली।

इसी तरह जिले की जायल (सुरक्षित) सीट पर मौजूदा विधायक मंजू बाघमार को चुनाव मैदान में उतारा हैं तथा कांग्रेस ने पूर्व मंत्री मंजू मेघवाल को मौका दिया हैं जबकि रालोपा ने पूर्व विधायक मोहन लाल बारुपाल के पौत्र अनिल बारुपाल को चुनाव मैदान में उतारकर मुकाबला त्रिकोणात्मक बना दिया हैं। पिछले चुनाव मंजू बाघमार ने मंजू मेघवाल को तेरह हजार से अधिक मतों से हराया था जबकि मंजू मेघवाल वर्ष 2008 में मंजू बाघमार को दस हजार से अधिक मतों से हराकर विधानसभा पहुंची थी।

मोहन लाल बारुपाल वर्ष 1993 एवं 1998 में कांग्रेस टिकट पर विधायल चुने गये। इससे पहले वह 1985 में लोकदल एवं 1990 में जनता पाटी से भी विधायक रहे। सुरक्षित जायल विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक अस्सी हजार से अधिक जाट मतदाता हैं जो निर्णायक माने जाते हैं और इससे इस बार बेनीवाल पार्टी के उम्मीदवार अनिल बारुपाल की स्थिति अच्छी मानी जा रही हैं। जायल में 1952 एवं 1957 में स्वतंत्र पार्टी के गंगासिंह, 1977 में मांगीलाल कांग्रेस, इसके बाद रामकरण कांग्रेस, वर्ष 2003 में मदल लाल मेघवाल ने भाजपा उम्मीदवार के रुप में चुनाव जीता। जायल में इस बार कुल आठ उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं।

जिले की मेड़ता सीट पर भाजपा ने पूर्व प्रधान भंवराराम रिठारिया को चुनाव मैदान में उतारा हैं लेकिन कांगेस ने नया चेहरा सोनू चितारा को मौका दिया हैं और रालोपा ने इंद्रा देवी को चुनाव मैदान में उतारकर मुकाबला त्रिकाणोत्मक बना दिया हैं। मेड़ता सीट पर बसपा के ताराचंद एवं आप पार्टी के प्रत्याशी जगदीश कुमार नायक सहित कुल दस उम्मीदवार चुनाव मैदान में अपना भाग्य आजमा रहे हैं।

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इसके अलावा जिले की लाडनूं सीट पर भी रालोपा ने पूर्व कृषि मंत्री हरजीराम बुरड़क के पुत्र जगन्नाथ बुरड़क को चुनाव मैदान में उतार देने से त्रिकोणात्मक मुकाबला होने की संभावना हैं। लाडनूं से भाजपा ने मौजूदा विधायक मनोहर सिंह को फिर मौका दिया गया जबकि कांग्रेस ने छात्र नेता रहे युवा मुकेश भाकर को चुनाव मैदान में उतारा हैं। मुकेश भाकर एवं जगन्नाथ पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं जबकि मनोहर सिंह वर्ष 1990 निर्दलीय , 2003 एवं 2013 में भाजपा उम्मीदवार के रुप में चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचे हैं। जगन्नाथ खुद तो नया चेहरा है लेकिन उसके पिता हरजीराम बुरड़क वरिष्ठ नेता रहे है और उन्होंने 1967 में स्वतंत्र, 1977 में जनता पार्टी, 1985 में लोकदल 1993 एवं 2008 में कांग्रेस उम्मीदवार के रुप में विधानसभा चुनाव जीता। इस सीट पर कड़ा त्रिकोणात्मक मुकाबला होने की संभावना हैं। श्री भाकर एवं बुरडक दोनों जाट प्रत्याशी होने से मनोहर सिंह को इसका फायदा हो सकता हैं।


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