अवैध रूप से चल रहे बालगृह पर पुलिस ने कसा शिकंजा

अवैध रूप से चल रहे बालगृह पर पुलिस ने कसा शिकंजा



लुधियाना। देश में कई बालगृहों में बच्चों की दयनीय हालत का खुलासा होने के बाद झारखंड और बिहार से लुधियाना के अवैध बालगृह में लाये गये 38 नाबालिगों के मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और ऐसी आशंका है कि कहीं इन्हें धर्मांतरण के लिये तो नहीं लाया गया था ।

पंजाब बाल अधिकार संरक्षण आयोग के चेयरमैन सुकेश कालिया ने कल रात यहां बताया कि झारखंड पुलिस इनमें से चार बच्चों को इस बालगृह से ले गयी ।इस मामले में झारखंड पुलिस ने इस बालग्रह के संचालक पर मामला दर्ज किया है ।झारखंड पुलिस ने इस केस में एक मामला दर्ज कर लिया है लेकिन पंजाब में इस मामले की जांच कर रहे या फिर प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर इस केस से जुड़े किसी अधिकारी ने अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं की है कि बच्चों को यहाँ धर्मांतरण के लिए लाया गया था या नहीं ।

हालाँकि सभी अधिकारियों ने बालग्रह में धर्मांतरण के इस मुद्दे को अभी एक जांच का विषय बताया है ।श्री कालिया की मानें तो अभी उनकी जांच इन सभी पहलुओं पर चल रही है । लाए गए 38 नाबालिगों के धर्मांतरण का मुद्दा इस वक्त चर्चा का विषय बना है।

इन बच्चों को लुधियाना के फुल्लांवाल नामक इलाके में पैस्किम मैरी क्रास नामक एक निजी बालगृह में रखा गया ।

उनके अनुसार इनमें झारखंड के 34 और बिहार के चार बच्चे हैं 1 झारखंड के 34 में से 30 बच्चे चाईबासा से तथा दो-दो खूंटी और रांची जिले से लाए गए थे। हालाँकि 24 अगस्त को झारखंड पुलिस स्थानीय पुलिस की मदद से इनमें से चार बच्चों को और इस बालग्रह के संचालक को हिरासत में लेकर झारखंड वापस ले गई थी। जबकि बिहार से आए चार बच्चे अभी लुधियाना के दोराहा स्थित शेल्टर होम में हैं ।लुधियाना बाल कल्याण समिति और आयोग की जांच के बाद अाधिकारिक तौर पर बच्चों को उनके घर भेजा जाएगा.

उनके अनुसार लुधियाना स्थित बाल कल्याण समिति के मुताबिक पैस्किम मैरी क्रास नामक इस बालगृह में बच्चों को अवैध रूप से रखा जाता था। इस मामले में चाईबासा के एक शख्स को भी चिन्हित किया गया है। वह अपने जिले के बच्चों को लाकर लुधियाना के पैस्किम मैरी क्रास बालगृह में रखता था। बिहार के सत्येंद्र प्रकाश मूसा नामक एक व्यक्ति को झारखंड पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

बाल कल्याण समिति के मुताबिक अच्छी शिक्षा तथा अच्छी परवरिश का प्रलोभन देकर बच्चों के परिजनों को झांसे में लिया जाता था। दूसरी तरफ धर्मांतरण का मामला होने की भी जांच की जा रही हैं ।तीस बच्चों की भी जांच की जाएगी कि आखिर वे बच्चे कहां गए ।

ज्ञातव्य है कि पिछले हफ्ते गुरुवार के दिन झारखंड के चाईबासा के देह व्यापार निरोधक यूनिट के थाना प्रभारी बनारसी राम अपनी टीम के साथ लुधियाना पहुंचे थे और पहले वो एक सरकारी शेल्टर होम पहुंचे। पैस्किम मैरी क्रास बालगृह को सील किए जाने के बाद वहां के आठ बच्चों को सरकारी शेल्टर होम में रखा गया था। आठ में तीन लड़कियों समेत चार बच्चे झारखंड के रांची और खूंटी के हैं, जबकि बाकी चार बिहार के रहने वाले हैं। झारखंड के बच्चों को पुलिस वापस ले गई है।

पैस्किम में रखे गए झारखंड के शेष 30 बच्चों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। आशंका है कि उन्हें बालगृह के संचालकों ने मामले का खुलासा होने के डर से गुपचुप तरीके से चाईबासा भेज दिया है।

झारखंड से आए पुलिस अधिकारी ने साफ कर दिया है कि यह सेंटर पूरी तरह से अवैध रूप से चलाया जा रहा था और उन्हें अपनी प्रारंभिक जांच में कुछ गड़बड़ लगा 1तीस बच्चों की तलाश की जा रही है ।

उनका कहना है कि इस बालग्रह को अवैध होने के कारण बंद कराया था ।इसका कोई रजिस्ट्रेशन भी नहीं था 1आयोग मामले की पूरी जांच कर रहा है कि बच्चों काे धर्मांतरण के लिये लाया गया था । जांच के लिए इस बालग्रह से कई दस्तावेज भी अपने कब्ज़े में लिए है और साथ ही अन्य तथ्यों की भी जांच की जा रही है ।

पंजाब पुलिस के मुताबिक वो झारखंड पुलिस के आने से पहले ही आयोग और लुधियाना स्थित बाल कल्याण समिति के अधिकारियों के लगातार सम्पर्क में थे और ऐसे बालग्रहों के खिलाफ कार्रवाई करने लिए वो अपना पूर्ण सहयोग दे रहे थे । झारखंड पुलिस को भी बाल ग्रह के संचालक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने में पूरा सहयोग दे रहें हैं । इस मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच की जा रही हैं ।


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