मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर में गुजरा अटलजी का अधिकांश समय

मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर में गुजरा अटलजी का अधिकांश समय


ग्वालियर। देश के पूर्व प्रधानमंत्री रहे भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता अटल बिहारी वाजपेयी दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में बेहद नाजुक हालत में भर्ती हैं और उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है। देशभर के नेता उन्हें देखने के लिए एम्स पहुंच रहे हैं। उनकी नाजुक हालत की खबर सुनकर ग्वालियर में उनके आवास पर लोगों की भीड़ जमा हो गई है। पुलिस-प्रशासन ने उनके आवास के आसपास चौकसी बढ़ा दी है। बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का मध्य प्रदेश के ग्वालियर से गहरा नाता रहा है। अटलजी का बचपन तो ग्वालियर की गलियों में गुजारा, वही अस्वस्थता के चलते सार्वजनिक जीवन से दूर होने के बाद भी वे कई साल से ग्वालियर में ही रह रहे हैं। कुल मिलाकर उनके जीवन का अधिकांश समय ग्वालियर शहर में बीता है।

उत्तरप्रदेश के बटेश्वर नगर में 25 दिसम्बर 1924 को जन्में अटल जी अपने माता-पिता की सातवीं संतान हैं। पिता पंडित कृष्ण बिहारी बाजपेयी ग्वालियर रियासत में शिक्षक की नौकरी लगने के बाद अपने परिवार के साथ ग्वालियर ही बस गए थे। अटलजी का पूरा बचपन ग्वालियर की गलियों में बीता और यहीं उन्होंने जवानी की दहलीज पर कदम रखा। उन्होंने विक्टोरिया कॉलेज से अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। उन्हें बचपन से कविताएं लिखने और कवि सम्मेलनों में अपनी कविताएं सुनाने का शौक था। वहीं कॉलेज में वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में वे हमेशा भाग लेते थे और अपने ओजस्वी भाषण से सबका दिल जीत लेते थे।

अटलजी ने स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई थी। 1942 में उन्होंने भारत छोड़ों आंदोलन में सक्रिय योगदान दिया, जिसके चलते उन्हें 23 दिन तक जेल में भी बंद रहना पड़ा। इसके साथ ही उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत हुई। वर्ष 1951 में वे भारतीय जनसंघ के सम्पर्क में आए और उन्होंने वर्ष 1955 में पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन वे चुनाव हार गए थे। लेकिन आज सबसे ज्यादा बार सांसद रहने का रिकॉर्ड उन्हीं के नाम है। विपक्षी भी उनकी वाक्पटुता के कायल थे। जनसंघ से बनी भारतीय जनता पार्टी को आज इस मुकाम तक पहुंचने में अटलजी की खास भूमिका रही है। अटली ने बचपन के साथ-साथ अपने जीवन का अधिकांश समय ग्वालियर शहर में ही गुजारा है।


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