कमलनाथ मंत्रिपरिषद के 11 मंत्रियों पर दर्ज हैं आपराधिक मामले

कमलनाथ मंत्रिपरिषद के 11 मंत्रियों पर दर्ज हैं आपराधिक मामले


भोपाल । प्रदेश में स्वच्छ और भ्रष्टाचार रहित प्रशासन देने का वादा करने वाले मुख्यमंत्री कमलनाथ के मंत्रिपरिषद के 11 मंत्रियों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन पर प्रदेश की विभिन्न अदालतों में मुकदमे लंबित हैं।

मध्यप्रदेश इलेक्शन वाच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस के दो मंत्रियों पर घरेलू हिंसा एवं दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामले दर्ज हैं। जबकि एक मंत्री मर्डर केस में आरोपित हैं। कांग्रेस के कद्दावर नेता व पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के पुत्र अजय सिंह पर भोपाल व बुरहानपुर में मामले दर्ज हैं। सिंह पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह ने मानहानि का मामला दर्ज करवाया है। जबकि घरेलू हिंसा का मामला सिंह की मां सरोज कुमारी की ओर से दर्ज है। अजय सिंह पूर्व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे। इस बार वे अपनी परंपरागत सीट चुरहट से चुनाव हार गए। जिन मंत्रियों पर मामले चल रहे हैं, उनमें से अधिकांश मामलों में अदालत में चालान भी पेश नहीं किए गए हैं।

नए मंत्रियों में खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के खिलाफ कुल 22 मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई। तोमर के खिलाफ धारा 123(1) के तहत जनप्रतिनिधित्व अधिनियम व शासकीय कार्य में बाधा डालने के मामला दर्ज है। तोमर पर भोपाल में 5 और ग्वालियर में 17 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से अधिकांश मामले भोपाल और ग्वालियर कोर्ट में चल रहे हैं।

मध्य प्रदेश की एडीआर को-आर्डिनेटर रोली शिवहरे ने कहा कि प्रदेश के लिए यह एक चेतावनी है। अगर बीते चुनावों और इस चुनाव के आंकड़े देखें तो ऐसे प्रत्याशियों की संख्या बढ़ी है जिन पर हत्या और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसी धाराओं में मामले दर्ज हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस के हाई-प्रोफाइल विधायक और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की गुडलिस्ट में शामिल उच्च शिक्षा, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री जीतू पटवारी का नाम आता है। पटवारी पर इंदौर व धार में कुल 12 मामले दर्ज हैं। इनमें से ज्यादातर मामले बलवा करने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और रेल सुरक्षा अधिनियम के तहत दर्ज हैं। पटवारी पर थाना राजगढ़, थाना भंवरकुआ, थाना राजेंद्र नगर में मामला दर्ज है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सुखदेव पांसे हत्याकांड मामले में आरोपी है। पांसे मुतलाई में हुए पारधी कांड के मुख्य आरोपी हैं। इन पर सीबीआई अदालत जबलपुर में मामला विचाराधीन है। मुलताई में 11 साल पहले पारधी बस्ती में सामूहिक दुष्कर्म, आगजनी और लूटपाट की वारदात हुई थी। इस मामले के गवाह ब्रोन्द्रू दंपति की बाद में हत्या हो गई थी। इस हत्याकांड में ही पांसे मुख्य आरोपी हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी पर घरेलू हिंसा का मामला दर्ज है।

दो साल पहले इमरती देवी के भतीजे की बहू क्रांति देवी ने उन पर घरेलू हिंसा का मामला दर्ज करवाया था। इस मामले में क्रांति देवी की शिकायत पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। बाद में कोर्ट के हस्तक्षेप से मामला दर्ज हुआ। इसी तरह पशुपालन, मछुआ कल्याण मंत्री लाखन सिंह पर धारा 498 के तहत दहेज प्रतिषेध अधिनियम का मामला दर्ज है। कुटीर एवं ग्रामोïद्योग मंत्री हर्ष स्वरूप यादव पर वलवा क रने और वित्त मंत्री तरुण भनोट पर धारा 147 व 188 के तहत शासकीय कार्य में बाधा डालने का मामला चल रहा है। गृहमंत्री बाला बच्चन पर बड़वानी में धारा 341 का मामला दर्ज है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री और प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्षकमलेश्वर पटेल पर हाईकोर्ट में धारा 465 और 471 के तहत कूटरचना का मामला चल रहा है। विधि मंत्री पीसी शर्मा पर शासकीय कार्य में बाधा डालने व गलत तरीके से रोकने सहित कुल 14 मामले दर्ज हैं। नगरीय विकास मंत्री जयवर्धन सिंह पर भी जनहित में जनआंदोलन से संबधित एक मामला भोपाल में चल रहा है। सिंह पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के पुत्र हैं।

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रिपोर्ट के अनुसार, इस बार पिछले चुनाव यानी वर्ष 2013 के मुकाबले आपराधिक प्रवृत्ति के ज्यादा विधायक चुनकर आए हैं। निर्वाचित 230 सदस्यों में से 94 यानी 41 प्रतिशत ऐसे हैं, जिन पर आपराधिक मामले हैं। इनमें से 47 यानी 20 प्रतिशत ऐसे हैं, जिन पर आपराधिक मामला है। इस बार के निर्वाचित सदस्यों में आपराधिक प्रवृत्ति के सदस्यों की संख्या कहीं ज्यादा है। वर्ष 2013 में निर्वाचित सदस्यों में से 73 यानी 32 प्रतिशत ऐसे थे, जिन पर आपराधिक मामले थे। इसमें गंभीर अपराधों में लिप्त सदस्यों की संख्या 45 यानी 19 प्रतिशत थी। निर्वाचित सदस्यों में छह ऐसे हैं, जिन पर हत्या के प्रयास का प्रकरण दर्ज है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 99 ऐसे उम्मीदवार उतारे थे, जिन पर विभिन्न थानों में प्रकरण दर्ज हैं। इनमें से 56 उम्मीदवार चुनाव जीतकर विधायक बन गए हैं। भाजपा के कुल 71 उम्मीदवार आपराधिक छवि के थे। इनमें से 34 उम्मीदवार विधायक बनने में कामयाब रहे।

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