भोपाल गैंगरेप मामले में उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार को लगाई फटकार

भोपाल गैंगरेप मामले में उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार को लगाई फटकार

जबलपुर। भोपाल गैंगरेप मामले में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान वाली याचिका पर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाईं है। सिविल सर्विसेज़ की तैयारी कर रही छात्रा के साथ 31 अक्टूबर को भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन से चंद क़दमों की दूरी पर हुए सामूहिक दुष्कर्म की वारदात की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश हेमंत गुप्ता की खंडपीठ ने आज सरकार के रवैये पर गहरी नाराज़गी जताई।
सुनवाई के दौरान अदालत ने गैंगरेप पीड़ित छात्रा की प्राथमिकी दर्ज करने में देरी से लेकर उसकी मेडिकल जांच में हुई हीलाहवाली पर सरकार को जमकर आड़े हाथों लिया। न्यायालय ने इस गंभीर मामले में सरकार के रुख पर हैरानी जताते हुए 'ट्रेजडी ऑफ़ एरर्स' जैसी सख्त टिप्पणी की।
सुनवाई में प्रदेश सरकार की ओर से महाधिवक्ता पुरुषेन्द्र कौरव हाज़िर हुए और उन्होंने इस मामले में सरकार द्वारा अब तक की गई कार्रवाई का ब्यौरा अदालत के सामने रखा। महाधिवक्ता ने वारदात को अंजाम देने वाले चारों आरोपियों की गिरफ्तारी से लेकर प्राथमिकी दर्ज करने में हीलाहवाली करने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित करने की जानकारी अदालत को दी। इसके अलावा उन्होंने मेडिकल जांच में देरी के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा सम्बंधित अधिकारियों पर की गई कार्रवाई का ब्यौरा भी पेश किया। अदालत ने प्रदेश सरकार को 15 दिन के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करने भी निर्देश दिए हैं। मामले पर अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी।
भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन के आउटर पर कोचिंग से लौट रही 19 वर्षीय छात्रा के साथ 31 अक्टूबर की शाम साढ़े सात बजे से लगभग तीन घंटे तक चार दरिंदों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। मामला दर्ज कराने के लिए पीड़िता को अपने पुलिसकर्मी परिजन के साथ कई थानों में भटकना पड़ा था। बाद में वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के पश्चात प्रकरण दर्ज हुआ था। पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
मामले के तूल पकड़ने पर तीन थाना प्रभारी एवं दो उप निरीक्षक निलंबित किए गए हैं। भोपाल के पुलिस महानिरीक्षक, रेल पुलिस अधीक्षक और एक नगर पुलिस अधीक्षक को उनके पदों से हटा दिया गया है।
सुल्तानिया जनाना अस्पताल में पीड़िता की चिकित्सा जांच हुई थी। इसमें पहले दी गई रिपोर्ट में सहमति के साथ सेक्स का उल्लेख किया गया था। साथ ही 'विक्टिम' के बजाय 'एक्यूस' लिख दिया गया था। जब इस रिपोर्ट में गड़बड़ी पकड़ में आई तो वरिष्ठ डॉक्टर से फिर नई रिपोर्ट बनवाई गई, जिसमें सामूहिक दुष्कर्म की बात कही गई है।इस मामले में पहली मेडिकल रिपोर्ट में लापरवाही बरतने वाली दो डॉक्टरों को निलंबित कर दिया गया है। एक अन्य डॉक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

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