आईएएस शिखा राजपूत तिवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप, विशेष सचिव करेंगे जांच

आईएएस शिखा राजपूत तिवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप, विशेष सचिव करेंगे जांच


रायपुर । राज्य सरकार ने आईएएस शिखा राजपूत तिवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर जांच के आदेश दिये हैं। स्वास्थ्य सचिव निहारिका बारिक ने गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव भुवनेश यादव को जांच का जिम्मा देते हुए दस दिनों के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा है। तीन अलग-अलग बिंदुओं पर स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव भुवनेश यादव इसकी जांच करेंगे।

स्वास्थ्य विभाग से जारी निर्देश में कहा गया है कि आयुष्मान योजना, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना और संजीवनी सहायता कोष से जुड़े भुगतान के लिए क्या अस्पतालों से कमीशन की मांग की गई ? क्या अस्पतालों से संजीवनी सहायता कोष भुगतान दिए जाने में भेदभाव किया जा रहा है अथवा भुगतान में अनावश्यक विलंब किया जा रहा है? क्या योजना से बाहर किए गए अस्पतालों का पुन: पंजीयन उच्च अधिकारियों के बिना अनुमोदन या अनुमति से संचालनालय स्तर पर ही कर लिया गया।

उल्लेखनीय है कि आईएएस शिखा राजपूत तिवारी को हाल ही में बेमेतरा कलेक्टर बनाया गया है। पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी विजयेंद्र कटरे की संविदा नियुक्ति से जुड़े एक मामले में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव की नाराजगी के बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसके बाद स्वास्थ्य महकमे में इसे खींचतान से जोड़कर भी देखा गया।

विभागीय सूत्रों के अनुसार गत दिनों स्वास्थ्य विभाग की सचिव निहारिका बारिक को बिलासपुर, जांजगीर चांपा और रायपुर के डॉक्टरों ने लिखित में शिकायत दी थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि आयुष्मान भारत, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा और संजीवनी सहायता कोष योजना के क्लेम में जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। डॉक्टरों ने अपने आरोप में कहा था कि अस्पतालों से अवैध वसूली की जा रही है। जानबूझकर भुगतान रोके जा रहे हैं। भुगतान के बदले में 5 से 10 फीसदी तक कमीशन की मांग की जा रही है। इन्ही शिकायतों के आधार पर छत्तीसगढ़ की तत्कालीन हेल्थ डायरेक्टर और वर्तमान में बेमेतरा कलेक्टर शिखा राजपूत तिवारी के खिलाफ राज्य सरकार ने जांच बिठा दी है।


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