पांच साल में रेत की मानिंद ढह गया इनेलो का दुर्ग- अपने हुए बेगाने, विधानसभा में 19 सदस्यों से 5 पर सिमट गई पार्टी

पांच साल में रेत की मानिंद ढह गया इनेलो का दुर्ग- अपने हुए बेगाने, विधानसभा में 19 सदस्यों से 5 पर सिमट गई पार्टी


चंडीगढ़। चुनाव के वक्त 'आयाराम-गयाराम' की राजनीति के लिए मशहूर हरियाणा में पहली बार ऐसा हुआ है कि पांच वर्ष के कार्यकाल में मुख्य विपक्षी पार्टी इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) का दुर्ग रेत की मानिंद ढह गया। इस दौरान अपने भी बेगाने हो गए। वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में जनता ने पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का राजतिलक किया। सत्तारूढ़ कांग्रेस को मुंह खानी पड़ी और इनेलो मुख्य विपक्षी दल बना। मगर एक ही वर्ष में इनेलो की स्थिति ऐसी हो गई कि पार्टी के 19 विधायकों की संख्या गिरकर पांच पर पहुंच गई। भगदड़ का यह सिलसिला थमा नहीं। बुधवार को इनेलो के राज्यसभा सदस्य रामकुमार कश्यप ने भी जयराम जी कर भाजपा का दामन थाम लिया। इस दौरान कांग्रेस के सदस्यों की संख्या बढ़कर छह हो गई।

आमतौर पर कार्यकाल की समाप्ति के करीब होने पर सत्ताधारी पार्टी लोकप्रियता में गिरावट की ओर होती है। मगर हरियाणा में उलटा हो रहा है। विधानसभा चुनाव की उलटी गिनती शुरू होते ही सत्तारूढ़ भाजपा के चेहरे पर नूर बढ़ रहा है और विपक्षी खेमे में मायूसी छा रही है। हाल यह है कि विधानसभा नेता प्रतिपक्ष ही नहीं है। विधानसभा में इस समय पांच सीटें खाली हैं।

मंगलवार को इनेलो के दो और विधायक भाजपा में जा चुके हैं। 2014 में नब्बे सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव में भाजपा के 47 उम्मीदवार जीते थे। जींद से इनेलो विधायक डॉ. हरिचंद मिढ्ढा के निधन के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार डॉ. कृष्ण मिढ्ढा की जीतने से यह संख्या बढ़कर 48 हो गई है। पिछले वर्ष के आखिर में इनेलो के महल में खाई चौड़ी गई। चौटाला परिवार में तलवारें खिंच आईं। नतीजा यह हुआ कि इनेलो के कई विधायक पार्टी छोड़ गए।

विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर फिलहाल इनेलो विधायकों की संख्या 14 है, लेकिन विधायक दल नेता अभय सिंह चौटाला के साथ मात्र पांच ही विधायक हैं। अभय के सिर से विपक्ष के नेता का ताज भी छिन चुका है। इसे इनेलो का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि गत पांच वर्षों में रणबीर सिंह गंगवा ने नलवा, केहर सिंह रावत ने हथीन और बलवान सिंह दौलतपुरिया ने फतेहाबाद विधानसभा क्षेत्र से इनेलो के टिकट पर चुनाव जीता पर तीनों इस्तीफा देकर भाजपा में जा चुके हैं। नारायणगढ़ से भाजपा विधायक रहे नायब सिंह सैनी अब कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। वह भी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। पिहोवा से इनेलो के विधायक जसविंदर सिंह संधू के देहांत की वजह से यह सीट भी खाली है।

कांग्रेस की स्थिति अजीब-ओ-गरीब है। हालांकि कांग्रेस के विधायकों की संख्या 15 से बढ़कर 17 हो चुकी है। 2014 के आम चुनाव में आदमपुर से कुलदीप बिश्नोई और हांसी से रेणुका बिश्नोई ने हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) के टिकट पर चुनाव लड़ा था। बाद में बिश्नोई दंपत्ति ने हजकां का कांग्रेस में विलय कर दिया। ऐसे में अब कांग्रेस ही विधानसभा में प्रमुख विपक्षी दल है। बावजूद इसके कांग्रेस अभी तक तय नहीं कर पाई है कि विधानसभा में उसका कौन सा विधायक नेता विपक्ष होगा। विधानसभा स्पीकर ने भी इस बारे में पत्र लिखा पर उसका जवाब अभी तक सामने नहीं आया।


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