सबसे बड़े एक्स्ट्रा डाज्ड पुल पर टॉल टैक्स कानून सम्मत, अहमद पटेल का दावा सही नहीं - एनएचएआई

सबसे बड़े एक्स्ट्रा डाज्ड पुल पर टॉल टैक्स कानून सम्मत, अहमद पटेल का दावा सही नहीं - एनएचएआई

भरूच। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने आज कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव और राज्यसभा सांसद अहमद पटेल का यह दावा सही नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों इस साल में मार्च में यहां उद्घाटित देश के सबसे लंबे एक्स्ट्रा डाज्ड केबल स्टे पुल के लिए टॉल टैक्स वसूली का पहले प्रावधान नहीं था
राष्ट्रीय राजमार्ग 8 के वडोदरा-मुंबई खंड पर मध्य गुजरात के भरूच में नर्मदा नदी पर 379 करोड की लागत से बने इस 1344 मीटर लंबे पुल का सात मार्च को मोदी ने लोकार्पण किया था। इस पर कल से टाॅल वसूली शुरू हो गयी। इसका विरोध करने वाले कांग्रेस के 33 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया था। पटेल, जो स्वयं भरूच के हैं, ने टॉल बूथ बनाने का विरोध करते हुए केंद्रीय परिवहन मंत्री नीतिन गडकरी को पत्र लिखा था। उन्होंने कहा था कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकार के कोष से बने इस पुल को पूर्ववर्ती संप्रग सरकार ने ईपीसी प्रणाली के तहत मंजूर किया था और इस पर टॉल वसूल करने का प्रावधान नहीं था।
एनएचएआई के अधिकारी तथा परियोजना निदेशक एस पी शर्मा ने आज यूनीवार्ता से कहा कि टॉल वसूली पूरी तरह नियमसम्मत है। पटेल का यह कहना सही नहीं है कि ईपीसी के तहत बने पुल अथवा सडक पर टॉल नहीं लिया जा सकता। वर्तमान में ही इस तरह से बने करीब एक सौ पुलों और सडकों पर टॉल वसूली की जा रही है।
इंजिनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन यानी ईपीसी योजना के तहत प्राधिकरण कोष मुहैया कराता है जबकि बनाओ, संचालन करो और स्थानांतरित करो यानी बीओओटी प्रणाली के तहत बनाने वाली कंपनी कोष जुटाती है। लेकिन टॉल दोनो के लिए ही लिया जाता है। नर्मदा पुल पर राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण और संग्रहण) नियम 2008 जिन्हें एनएचआईए अधिनियम 1988 के तहत बनाया गया था, के तहत टॉल लिया जा रहा है। यह पुराना नियम है। इसमें तीन दिसंबर 2010 से 14 मार्च 2017 के बीच दस संशोधन भी हुए हैं और इनके चलते वाहन मालिकों को कुछ राहत ही मिली है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भरूच के पुल पर स्थानीय वाहनों को टॉल से मुक्त रखने का निर्णय ठेकेदार है। ज्ञातव्य है कि कांग्रेस का आरोप है कि इस पर टॉल लगाना न केवल गलत है बल्कि इससे प्रतिदिन 12000 ट्रकों का बोझ ढोने वाले इस महत्वपूर्ण राजमार्ग पर आये दिन लगने वाली जाम की भीषण समस्या का समाधान भी नहीं हो पायेगा। ज्ञातव्य है कि इस राजमार्ग पर पिछले साल जून में 40 किमी लंबा जाम लगा था।

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