राजद्रोह के मामले में हार्दिक पटेल का पूर्व साथी और सह-आरोपी बना सरकारी गवाह

राजद्रोह के मामले में हार्दिक पटेल का पूर्व साथी और सह-आरोपी बना सरकारी गवाह

अहमदाबाद। गुजरात में पाटीदार आरक्षण आंदोलन के दौरान दो साल पहले हुई हिंसा, जिसमें एक पुलिसकर्मी समेत कम से कम 14 लोगों की मौत हो गयी थी तथा अरबों रूपये की संपत्ति आगजनी तथा तोडफोड में नष्ट हुई थी, को लेकर पाटीदार अनामत आंदोलन समिति यानी पास के संयोजक हार्दिक पटेल समेत चार लोगों के खिलाफ दायर राजद्रोह के मुकदमे एक आरोपी केतन पटेल को इस सनसनीखेज मामले में सरकारी गवाह बनाने की अर्जी को एक स्थानीय अदालत ने आज मंजूर कर लिया।
जिला सत्र अदालत के जज एच एस वोरा की अदालत ने केतन की ओर से गत 27 जुलाई को दायर अर्जी को मंजूर कर लिया। केतन के वकील पंकज चौहाण ने बताया कि इस अर्जी में केतन ने खुद को निर्दोष बताते हुए उन्हें आरोपियों की सूची से हटाने और सरकारी गवाह बनाने का अनुरोध किया था। अदालत ने इसे आज स्वीकार कर लिया। अब इस मामले (मुकदमा संख्या 55/2016) में सिर्फ तीन ही आरोपी है, केतन अब इसमें गवाह के तौर पर ही पेश होंगे।
ज्ञातव्य है कि अहमदाबाद पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 25 अगस्त 2015 को यहां जीएमडीसी मैदान पर हार्दिक की अगुवाई में हुई विशाल आरक्षण रैली के बाद उसकी तथा कुछ अन्य की संक्षिप्त गिरफ्तारी के चलते फैली व्यापक हिंसा के बाद उसी साल अक्टूबर में यह मामला छह लोगों के खिलाफ दर्ज किया था । पर सूरत निवासी दो अन्य आरोपियों को छोड अन्य चार पर ही आरोप गठित किये गये। हार्दिक और केतन के अलावा पास के दो अन्य तत्कालीन संयोजक चिराग पटेल तथा दिनेश बांभणिया इसमें आरोपी थे। हार्दिक को छोड शेष तीन को पिछले साल अप्रैल में हाई कोर्ट ने इस शर्त पर जमानत दे दी थी कि वे भविष्य में कानून व्यवस्था के लिए संकट पैदा करने वाले किसी आंदोलन में हिस्सा नहीं लेंगे। राजद्रोह के एक अन्य मामले में भी आरोपी हार्दिक को बाद में जुलाई में छह माह तक गुजरात के बाहर रहने की शर्त पर जमानत मिली थी। केतन और चिराग ने बाद में हार्दिक पर आंदोलन के लिए मिले पैसे में हेराफेरी करने और खुद के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए पास से नाता तोड लिया था। दिनेश अब भी उनके साथ हैं।
राजद्राेह के प्रकरण में हार्दिक सूरत के लाजपुर सेंट्रल जेल में जबकि केतन तथा दो अन्य आरोपी यहां साबरमती सेंट्रल जेल में बंद रहे थे। उधर केतन ने आज पत्रकारों से कहा कि उनकी किसी भी हिंसक गतिविधि में संलिप्तता नहीं थी। वह केवल हार्दिक के साथ भर थे पर आंदोलन और अन्य गतिविधियों का संचालन पूरी तरह हार्दिक के ही हाथ में था। ज्ञातव्य है कि अपने एक अन्य साथी महेसाणा में पास के संयोजक नरेन्द्र पटेल से मारपीट अौर लूटपाट के एक अन्य मामले में हार्दिक फिलहाल पाटन पुलिस की हिरासत में हैं। समझा जाता है कि पूर्व साथी केतन पटेल के सरकारी गवाह बनने से राजद्राेह के उक्त मामले में उनकी मुश्किलें बढ सकती हैं।

Share it
Top