बड़े घपले हैं गुरूजी की राह में ...खुली पोल तो केस दर्ज : स्कूल में नामांकन कराए बगैर मैट्रिक पास कर बन गई पंचायत शिक्षक

बड़े घपले हैं गुरूजी की राह में ...खुली पोल तो केस दर्ज : स्कूल में नामांकन कराए बगैर मैट्रिक पास कर बन गई पंचायत शिक्षक


बेगूसराय। शिक्षक नियोजन के नाम पर जिसे जहां मौका मिला, उसने जमकर लूट मचाई। पैसा के आगे सब कुछ दरकिनार कर नियोजन इकाइयों ने मनमाने तरीके से नियोजन किया। कुछेक शिक्षक तो ऐसे भी बने जिसने मैट्रिक की परीक्षा भी नहीं दिया। सिर्फ बेगूसराय जिले में ही कई ऐसे शिक्षक हैं, जो फर्जी तरीके से बीटीइटी के सर्टिफिकेट का जुगाड़ कर लिया। पिछले महीने डंडारी में ऐसे कई मामले के आरोपी पकड़े गए हैं। हालांकि सरगना अभी तक पकड़ से दूर है। अब तो निगरानी ने 14 वैसे शिक्षकों के विरुद्ध वीरपुर थाना में मामला दर्ज कराया है, जिनका मैट्रिक अंकपत्र ही फर्जी है। इसमें एक शिक्षिका हैं जिनका नामांकन भी संबंधित प्रमाण पत्र वाले विद्यालय में नहीं था। नौला पंचायत में 2006 में शिव कुमारी का नियोजन किया गया। नियोजन के समय संलग्न मैट्रिक के प्रमाण पत्र में उसने उच्च विद्यालय पहसारा बभनगामा से वर्ष 1988 में रोल कोड 6409, रोल नंबर 0414 से 645 अंक के साथ प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण होने की बात कही है। जबकि सत्यापन में पाया गया कि 6406 के बाद कोड व्यवहार ही नहीं किया गया। विद्यालय के प्रधान ने भी लिख कर दिया है कि शिव कुमारी न तो इस विद्यालय में नामांकित थी और न ही कभी पढ़ीं। वीरपुर पश्चिमी पंचायत में 2006 में नियोजित रीता कुमारी ने अंक प्रमाण पत्र दिया था द्वितीय श्रेणी से 1992 में मैट्रिक पास होने का। जबकि उस वर्ष संबंधित रोल कोड एवं क्रमांक से अनिता कुमारी पास हुई थी। दोनों के पिता का नाम एक ही है।

भवानंदपुर पंचायत में 2006 में नियोजित रेखा देवी एवं सुचीता कुमारी ने जो रोल कोड एवं अंकपत्र लगाया है, उसका उपयोग ही नहीं किया गया था। इसी तरह से गेन्हरपुर पंचायत में 2006 में नियोजित दिलीप कुमार पासवान ने उच्च विद्यालय मोहद्दीनगर का प्रमाण पत्र संख्या जमा किया है। जबकि वह संख्या उच्च विद्यालय गोखले नगर विशनपुर के कामिनी कुमारी के नाम का है। डीह पंचायत में नियोजित विभूति भूषण झा ने जो प्रमाण पत्र क्रमांक लगाया है। वह असल में दूसरे विद्यालय के पंकज कुमार का है। पर्रा पंचायत में 2006 में नियोजित रामबाबू रजक ने जो प्रमाण पत्र क्रमांक जमा किया है। वह भी दूसरे विद्यालय के राम शंकर कुमार सिंह के नाम से निर्गत है। 2006 में प्रखंड शिक्षक के पद पर नियोजित शिवनंदन महतो ने जिस क्रमांक का प्रमाण पत्र जमा किया है। वह दूसरे विद्यालय के इंदिरा कुमारी के नाम से निर्गत है। भवानंदपुर पंचायत में 2006 में नियोजित लीलावती कुमारी ने जो प्रमाण पत्र लगाया है। वह लख्मी चंद पंडित के नाम से निर्गत है। इसी पंचायत में नियोजित निशा कुमारी ने जो क्रमांक दर्शाया है। वह अखिलेश कुमार सिंह के नाम से निर्गत है। इसी पंचायत में नियोजित रंजू कुमारी ने जो क्रमांक लगाया है। वह दूसरे विद्यालय का है। डीह पंचायत में 2014 में नियोजित रणवीर कुमार, पिता अरुण कुमार ने 511 अंक के साथ प्रथम श्रेणी का प्रमाण पत्र जमा किया है। जबकि असल में यह प्रमाण पत्र रणवीर कुमार, पिता गणेश सहनी 379 अंक एवं द्वितीय श्रेणी का है।

रणवीर कुमार के मैट्रिक एवं बीटीइटी सर्टिफिकेट में अंकित जन्मतिथि भी अलग-अलग है। भवानंदपुर पंचायत में 2006 में नियोजित कैशर कमाल नियाजी ने मदरसा बोर्ड के मौलवी का सर्टिफिकेट लगाया ने कहा है। जबकि बोर्ड ने कहा है कि यह प्रमाण पत्र फर्जी है। इसके अलावा अन्य नामजद शिक्षकों के अंकपत्र में भी भारी पैमाने पर फर्जीवाड़ा करने का खुलासा हुआ है। अब फर्जीवाड़ा पकड़े जाने बाद पूरे जिला के दो सौ से भी अधिक फर्जी शिक्षकों में हड़कंप मच गया है। दर्ज कराए गए प्राथमिकी में निगरानी ब्यूरो के मुजफ्फरपुर प्रक्षेत्र के पुलिस निरीक्षक कन्हैया लाल ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इन शिक्षकों ने छलकर, षड्यंत्र के तहत नियोजन इकाई के सहयोग से नियोजन करवा लिया तथा इसमें और लोग भी शामिल हैं, इसका गहन अनुसंधान किया जाए। अगर निष्पक्षता से जांच पड़ताल हो तो पंचायत सचिव के साथ कई मुखिया एवं मुखिया के पति जेल जाएंगे। लेकिन सवाल उठता है की कार्रवाई क्या होगी। क्या नियोजित शिक्षक एवं नियोक्ता समेत अन्य दोषी की संपत्ति जब्त कर सरकारी राजस्व के हुए लूट की भरपाई होगी या मामला जुगाड़ के जंजाल में फंस जाएगा। शिक्षा विभाग कार्यालय के सूत्र बताते हैं कि जिला के सभी नियोजित शिक्षकों के अष्टम वर्ग से इंटर तक के प्रमाण पत्रों का बारीकी से गहन सत्यापन हो तो, सभी थाने में मामला दर्ज करवाने की नौबत आएगी और यह संख्या 300 को भी पार कर सकती है।


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