दिल्ली: साठ करोड़ लोग झेल रहे पानी की गंभीर किल्लत

दिल्ली: साठ करोड़ लोग झेल रहे पानी की गंभीर किल्लत

नयी दिल्ली । देश की लगभग आधी आबादी यानी 60 करोड़ लोगों को पानी की गंभीर किल्लत झेलनी पड़ रही है जबकि 75 प्रतिशत आबादी को पीने के पानी के लिए दूर दूर तक जाना पड़ता है।
नीति आयोग द्वारा आज यहाँ जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही गयी है। इसमें बताया गया है कि गाँवों में 84 प्रतिशत आबादी जलापूर्ति से वंचित है। जो पानी उपलब्ध है उसमें भी 70 प्रतिशत प्रदूषित है। वैश्विक जल गुणवत्ता सूचकांक में 122 देशों में भारत 120वें स्थान पर है।
आयोग ने जल प्रबंधन के क्षेत्र में राज्यों में प्रतिस्पर्द्धा बढ़ाने के लिए आज उनकी रैंकिंग जारी की है। नदी विकास, जल संसाधन एवं गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी और नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत तथा उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने 'समेकित जल प्रबंधन सूचकांक' नामक यह रिपोर्ट जारी करते हुये बताया कि इस मामले में गुजरात पहले स्थान पर है। इसके बाद क्रमश: मध्य प्रदेश, आँध्र प्रदेश, त्रिपुरा, हरियाणा और महाराष्ट्र का स्थान रहा है। रिपोर्ट वर्ष 2015-16 और 2016-17 के आँकड़ों पर तैयार की गयी है।
श्री गडकरी ने कहा कि देश की सबसे बड़ी समस्या पानी की है। इसके लिए उन्होंने खराब जल प्रबंधन को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा "मैं कहता हूँ पानी की कमी नहीं है, पानी के नियोजन की कमी है। राज्यों के बीच जल विवाद सुलझाना, पानी की बचत करना और बेहतर जल प्रबंधन कुछ ऐसे काम हैं जिनसे कृषि आमदनी बढ़ सकती है और गाँव छोड़कर शहर आये लोग वापस गाँव की ओर लौट सकते हैं।"
उन्होंने कहा कि चिरस्थायी संवहनीय कृषि का राज्यों का विकास में बड़ा योगदान होता है और इसके लिए पानी का प्रबंधन महत्त्वपूर्ण है।

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