सुप्रीम कोर्ट ने दिए सीएलएटी परीक्षार्थियों की नए सिरे से मेरिट लिस्ट तैयार करने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने दिए सीएलएटी परीक्षार्थियों की नए सिरे से मेरिट लिस्ट तैयार करने के निर्देश

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (सीएलएटी) 2018 में शामिल परीक्षार्थियों की नए सिरे से मेरिट लिस्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परीक्षा में तकनीकी खामियों व कंप्यूटर में खराबी आने के कारण जिन छात्रों को परीक्षा देने में दिक्कत आई है उन्हें कंपेंसेटरी अंक देने के बाद नए सिरे से मेरिट लिस्ट तैयार की जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि पहले दौर की काउंसलिंग चलती रहेगी लेकिन दूसरे दौर की काउंसलिंग नई मेरिट लिस्ट के आधार पर ही होगी। छात्रों की शिकायतों के निस्तारण के लिए बनी कमेटी की अनुशंसाओं के मुताबिक करीब चार सौ छात्रों को कंपेंसेटरी अंक दिए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने नया मेरिट लिस्ट 16 जून तक तैयार करने का आदेश दिया।
पिछले 11 जून को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर मे सीएलएटी को दोबारा करवाने से इनकार किया था। मामले पर सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील वी गिरी ने कहा था कि करीब 54 हजार छात्रों ने परीक्षा दी थी। उनका सत्र जुलाई के पहले सप्ताह से शुरू होगा। करीब चार हजार छात्रों की शिकायतें दर्ज की गई हैं। इनमें करीब 1068 शिकायतें डुप्लीकेट थी। कुछ शिकायतें एक ही तरह की थीं।
वी गिरी ने सुप्रीम कोर्ट को सुझाव देते हुए कहा कि अधिसंख्य (supernumerary) सीटें सृजित की जाएं। एक अंक पाने वाले सभी छात्रों की रैंकिंग बराबर रखी जाए जैसे ऑल इंडिया रैंकिंग 51 ए, 51बी, 51सी। पिछले 06 जून को छात्रों की शिकायतों के निस्तारण के लिए बनी कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि परीक्षा का रिजल्ट कमेटी की अनुशंसाओं के मुताबिक हुए हैं। तब कोर्ट ने कहा कि हम दाखिला प्रक्रिया में दखल नहीं दे सकते हैं। कोर्ट ने कमेटी की रिपोर्ट शिकायतकर्ताओं को मुहैया कराने का निर्देश दिया। पिछले 30 मई को सुप्रीम कोर्ट ने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (सीएलएटी) 2018 की परीक्षा को दोबारा आयोजित करने की मांग करनेवाली याचिकाएं खारिज कर दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वो दोबारा परीक्षा कराने का आदेश तभी दें सकते हैं जब इसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का पता चले। इस परीक्षा में शामिल कुछ छात्रों को तकनीकी दिक्कतों की वजह से परेशानियां झेलनी पड़ी। उन छात्रों को राहत दी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की शिकायतों के निस्तारण के लिए बनी कमेटी को निर्देश दिया कि वे यह बताएं कि जिन छात्रों को तकनीकी दिक्कतों की वजह से परेशान होना पड़ा उन्हें कैसे राहत दी जा सकती है। कोर्ट के इस आदेश के बाद कमेटी ने आज रिपोर्ट सौंपी।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले 25 मई को छात्रों की समस्या के लिए 02 सदस्यीय कमेटी बनाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 30 मई तक कमेटी कोर्ट में अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने रिजल्ट 31 मई को घोषित करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जिस किसी भी हाईकोर्ट में छात्र की इस मामले पर याचिका दायर है, उसपर हाई कोर्ट सुनवाई नहीं करेगा और सुप्रीम कोर्ट में पहुंचे छात्रों को मिलने वाला लाभ हाई कोर्ट पहुंचे छात्रों को भी मिलेगा।
पिछले 24 मई को जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस नवीन सिन्हा की वेकेशन बेंच ने परीक्षार्थियों की शिकायतों के निपटारे के लिए एक नोडल एजेंसी गठित करने का सुझाव दिया था। याचिका में कहा गया था कि सीएलएटी 2018 की परीक्षा में काफी गड़बड़ियां हुई थीं। परीक्षा के दौरान प्रतिभागी छात्रों को कुप्रंबंधन का सामना करना पड़ा। परीक्षा में तकनीती गड़बड़ियों के कारण छात्रों को काफी कठिनाई हुई।
इन तकनीकी गड़बड़ियों के कारण कई छात्रों को पांच मिनट से लेकर आधे घंटे तक खराब हो गए। सीएलएटी के जरिए लॉ के पंचवर्षीय कोर्स में दाखिले के लिए अखिल भारतीय परीक्षा आयोजित की जाती है। इसी परीक्षा के आधार पर देश भर की नेशनल लॉ युनिवर्सिटी में दाखिला होता है। पिछले 13 मई को सीएलएटी की परीक्षा आयोजित की गई थी।

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