लोकसभा चुनाव में हार का असर...कांग्रेस की 'जेब' सिकुड़ी, वेतन कटौती को मजबूर पार्टी

लोकसभा चुनाव में हार का असर...कांग्रेस की जेब सिकुड़ी, वेतन कटौती को मजबूर पार्टी

लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस के लिए कुछ भी ठीक नहीं हो रहा। देश की सत्ता पर सबसे ज्यादा समय काबिज रहने वाली कांग्रेस की अब हालत ऐसी है कि वो अभी बिना कमान के है। राहुल गांधी भी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुके हैं। साथ ही पार्टी के कई वरिष्ठ नेता अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं। इसका असर पार्टी की कार्य प्रणाली पर भी दिख रहा है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि हार के बाद कांग्रेस खर्च में कटौती को मजबूर है, पार्टी के कई इकाईयों को दिए जाने वाले फंड में कटौती किए जाने की भी खबर है।

कांग्रेस ने की खर्चे में कटौती!

सूत्रों के हवाले खबर है कि कांग्रेस सेवादल के मासिक खर्च में कटौती की गई है। पार्टी अब कांग्रेस सेवा दल को ढाई लाख की जगह 2 लाख रुपये महीना दे रही है। साथ की पार्टी ने महिला कांग्रेस, नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) और यूथ कांग्रेस से भी खर्चों में कटौती करने को कहा गया।

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस मुख्यालय में काम रहे कर्मचारियों को हार के बाद अब तक वेतन नहीं मिला है, सिर्फ कांग्रेस संगठन के कर्मचारियों को वक्त पर तनख्वाह मिली। साथ ही पार्टी के सोशल मीडिया विभाग के 55 कर्मचारियों में अब महज 35 ही बचे। लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद सोशल मीडिया विभाग के कई कर्मचारी पहले ही छोड़कर चले गए। बचे कर्मचारियों को भी देर से सैलरी दी गई।

कार्यवाहक अध्यक्ष पद पर जल्द फैसला

वहीं, पार्टी के एक वरिष्ठ सूत्र ने शुक्रवार को आईएएनएस को बताया कि सीडब्ल्यूसी की बैठक के लिए आने वाले दिनों में एक तारीख तय की जाएगी। जिसमें पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष पद पर फैसला होगा। नेतृत्व संकट के बीच, कांग्रेस के पुराने और वरिष्ठ सदस्यों ने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से अस्थाई रूप से पद संभालने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए अनुरोध ठुकरा दिया।

कार्यवाहक अध्यक्ष पद के लिए कई वरिष्ठ नेताओं के नाम आगे चल रहे हैं। इनमें मुकुल वासनिक, मल्लिकार्जुन खड़गे, ज्योतिरादित्य सिंधिया और सुशील कुमार शिंदे शामिल हैं। सिंधिया ने हांलाकि कहा कि वह शीर्ष पद की दौड़ में नहीं हैं।

कांग्रेस में दिखा बिखराव, कई ने छोड़ी पार्टी

वहीं, इस सियासी उठा-पटक के बीच 134 साल पुरानी पार्टी कांग्रेस में बिखराव होता दिखाई दे रहा है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व स्तर पर उथल-पुथल के बीच राज्यों में विधायक और नेता पार्टी से नाता तोड़ने लगे हैं।पिछले एक महीने से तेलंगाना, कर्नाटक और गोवा में कई कांग्रेस विधायकों ने पार्टी छोड़ी है। पार्टी को सबसे बड़ा धक्का कर्नाटक में लगा जहां कांग्रेस के लिए सत्ता गंवाने की नौबत आ चुकी है।

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