खराब प्रदर्शन : सिद्धू के विरुद्ध कार्रवाई से 5 मंत्रियों समेत 24 विधायकों पर भी संशय के बादल

खराब प्रदर्शन : सिद्धू के विरुद्ध कार्रवाई से 5 मंत्रियों समेत 24 विधायकों पर भी संशय के बादल


चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा अपनी ही सरकार के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के विरुद्ध कार्रवाई ' सांप के मुँह में छछूंदर ' जैसी बन रही है। लोक सभा चुनावों में बुरे प्रदर्शन को लेकर अगर सिद्धू के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है तो इसी पैमाने पर कार्रवाई की जद में सरकार के ही 5 मंत्रियों को पद से हटाने समेत 24 कांग्रेसी विधायकों के विरुद्ध कार्रवाई करनी पड़ सकती है। हालांकि मुख्य मंत्री अपने मंत्री नवजोत सिद्धू के विरुद्ध करवाई के ऐलान सार्वजानिक रूप से कर चुके हैं।

चुनावों के दौरान मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने निर्देश जारी किये थे कि जिस भी मंत्री के क्षेत्र में कांग्रेस का संसदीय प्रत्याशी पराजित होगा, उस मंत्री से पद ले लिया जायेगा और ऐसे विधायकों के विरुद्ध कार्रवाई भी होगी और आगामी विधान सभा चुनावों में उन्हें टिकट नहीं दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि 117 सदस्यीय पंजाब विधान में कांग्रेस के 78 विधायक है।

हालांकि कांग्रेस ने पंजाब की 13 में से 8 सीटों पर विजय हासिल की है, परन्तु उसका मिशन -13 पूरा नहीं हो पाया। मुख्य मंत्री समेत 5 मंत्रियों ने मिशन -13 की असफलता के लिए कांग्रेस के स्टार प्रचारक और पंजाब के मंत्री नवजोत सिद्धू की प्रतिकूल बयानबाज़ी को जिम्मेवार बताया है। कैप्टन सरकार ने सिद्धू के विरुद्ध कार्रवाई भी कर ली है। चूँकि सिद्धू राहुल गाँधी के कोटे से हैं, इसलिए मुख्यमंत्री किसी प्रकार की कार्रवाई के लिए पहले पार्टी हाई कमान से भी अनुमति लेने के प्रयासों में है। पंजाब कांग्रेस में भी ऐसा प्रभाव है कि पार्टी हाई कमान भी कैप्टन को शक्तिशाली बनने और चुनौती देने की स्थिति में आने से रोकने के लिए समानांतर शक्तियों को शह दे ।

पंजाब सरकार का सिद्धू के खिलाफ एक्शन गले की फाँस बन रहा है। अपने शब्दों की वचनबद्धता के लिए मशहूर मुख्यमंत्री अगर अपने जारी निर्देशानुसार करवाई करने लगे तो 24 विधायकोंं, जिनमे पांच मंत्री भी शामिल हैं, के विरुद्ध कार्रवाई होगी। वो भी तब, अगर इसमें विधान सभा के मुखिया के रूप में स्पीकर को अलग रखा जाए। हालांकि डिप्टी स्पीकर अजैब सिंह भट्टी के विधान सभा क्षेत्र मलोट में कांग्रेस पराजित हुई है। पराजय के दायरे में आने वाले पांच मंत्री भी हैं , जिनमें बठिंडा शहरी के विधायक और वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल, गुरदासपुर लोक सभा सीट में आती विधान सभा दीनानगर की विधायक व मंत्री अरुणा चौधरी, होशियारपुर लोक सभा का विधान सभा क्षेत्र होशियारपुर से विधायक व मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा, फ़िरोज़पुर लोक सभा क्षेत्र में आते विधान सभा क्षेत्र गुरुहरसहाय के विधायक व मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी, जिन्हे मुख्यमंत्री का करीबी माना जाता है और संगरूर लोक सभा क्षेत्र से विधान सभा संगरूर के विधायक और मंत्री विजय इन्दर सिंगला शामिल हैं, जिनका अपने -अपने विधान सभा क्षेत्रों में ही प्रदर्शन निराशाजनक रहा।

इसके अतिरिक्त, जिन कांग्रेसी विधायकों का प्रदर्शन अपने ही विधान सभा क्षेत्रों में कमज़ोर रहा, उनमे गुरदासपुर लोक सभा क्षेत्र से भोआ के विधायक जोगिंदरपाल , पठानकोट के विधायक अमित विज , गुरदासपुर के विधायक बीरेंदरमीत सिंह पाहड़ा , व क़ादिया से विधायक फतेहजंग सिंह बाजवा शामिल हैं। इसी प्रकार जालंधर लोक सभा क्षेत्र से जालंधर सेन्ट्रल से विधायक राजिंदर बेरी और दसूहा से विधायक अरुण डोगरा, श्रीआनंदपुर साहिब के बलाचौर से विधायक दर्शन लाल, लुधियाना लोक सभा क्षेत्र के गिल विधान सभा से विधायक कुलदीप सिंह वैद्य, फरीदकोट लोक सभा से गिदड़बाहा के विधायक राजा वड़िंग (बठिंडा से कांग्रेस के प्रत्याशी भी थे), बठिंडा लोक सभा क्षेत्र के भुच्चों से विधायक प्रीतम सिंह कोटभाई , फ़िरोज़पुर लोक सभा क्षेत्र के फ़िरोज़पुर शहरी विधायक परमिंदर सिंह , फ़िरोज़पुर ग्रामीण से विधायक सतकार कौर , फाजिल्का से विधायक देवेंद्र सिंह घुबाया ( फ़िरोज़पुर से कांग्रेसी उम्मीदवार शेर सिंह घुबाया के बेटा ), बल्लुआना से विधायक नत्थू राम और संगरूर लोक सभा के धुरी विधान सभा के दलवीर सिंह खंगूड़ा शमिल है।

इसके अतिरिक्त कांग्रेस की बड़े कद की नेता और पूर्व मुख्य मंत्री राजिंदर कौर भट्ठल संगरूर में अपने ही लहरा विधान सभा क्षेत्र और मुख्यमंत्री के रिश्तेदार दीपिंदर ढिल्लों लोक सभा क्षेत्र पटियाला के अपने ही क्षेत्र डेरा बस्सी कांग्रेस प्रत्याशी को बढ़त दिलवाने में असफल रहे।


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