मप्र सरकार 6 माह के अंदर हर जिले में कम से कम 3 आदर्श गांव बनाए : एनजीटी

मप्र सरकार 6 माह के अंदर हर जिले में कम से कम 3 आदर्श गांव बनाए : एनजीटी


- इन आदर्श गांवों की घोषणा दो सप्ताह के अंदर करने का निर्देश

नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वो राज्य के हर जिले के कम से कम तीन गांवों को छह महीने के अंदर पर्यावरण नियमों का पालन करने वाला आदर्श गांव बनाएं। एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली बेंच ने इन आदर्श गांवों की घोषणा दो सप्ताह के अंदर करने का निर्देश दिया है। एनजीटी ने पूरे मध्य प्रदेश को एक साल के अंदर पर्यावरण नियमों का पालन करने वाला आदर्श राज्य बनाने का निर्देश दिया।

एनजीटी के समक्ष मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव सुधी रंजन मोहंती ने ठोस कचरों के निस्तारण के लिए बने कानून सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 को लागू करने संबंधी दिशानिर्देशों की अनुपालन रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट पर गौर करने के बाद एनजीटी ने मध्य प्रदेश सरकार को इस आदेश की अनुपालन रिपोर्ट हर तीन महीने में पेश करने का आदेश दिया। एनजीटी ने पहली अनुपालन रिपोर्ट 20 जुलाई तक पेश करने का निर्देश दिया। एनजीटी ने राज्य के मुख्य सचिव को सभी जिलों के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेटों के साथ महीने में एक बार इसकी मानिटरिंग करने का निर्देश दिया। एनजीटी ने मध्य प्रदेश के सभी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेटों और दूसरे अफसरों को इसके लिए ट्रेनिंग देने का निर्देश दिया। एनजीटी ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वो पर्यावरण को हुए नुकसान का आकलन करे और पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वालों से मुआवजा वसूले ।

मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव की ओर से अनुपालन रिपोर्ट में कहा गया था कि राज्य ने पिछले साल पर्यावरण को बचाने के लिए 9 राज्य-व्यापी अभियान चलाये। एनजीटी ने राज्य सरकार की इस बात के लिए सराहना की कि उसने छात्रों को जागरूक करने के लिए राज्य के करीब 25 हजार स्कूलों में सेमिनार, वर्कशाप इत्यादि के जरिए अभियान चलाया। राज्य सरकार ने वेस्ट मैनेजमेंट, सफाई, जल संरक्षण इत्यादि के क्षेत्र में स्कूलों के बीच प्रतियोगिता कराई और हर जिले में 6 स्कूलों को ग्रीन स्कूल का अवार्ड दिया। हर जिले के 250 स्कूलों में ईको-क्लब बनाए गए हैं, जिसमें पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों का आयोजन किया जाता है।

एनजीटी ने नोट दिया कि राज्य के 364 शहरी स्थानीय निकायों में सौ फीसदी डोर-टू-डोर कचरा संग्रह का कार्य किया जा रहा है। मध्य प्रदेश के शहरी इलाकों को सौ फीसदी खुले में शौच मुक्त घोषित किया गया है। राज्य सरकार ने प्लास्टिक कैरी बैग पर रोक लगाने के लिए 21 प्लास्टिक कैरी बैग निर्माता यूनिटों को बंद किया है।

एनजीटी ने मध्य प्रदेश की नदियों से अनधिकृत रूप से हो रहे बालू खनन पर चिंता जताई है। अखबार में छपी खबरों का हवाला देते हुए एनजीटी ने कहा कि मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में केन नदी का अस्तित्व ही खतरे में है। इस नदी पर बालू माफिया ने पानी के बहाव की दिशा बदल दी है और खनन कार्य के लिए 20 मीटर लंबा पुल बना लिया है। उस पुल को पन्ना में दो बार जिला प्रशासन तोड़ चुका है।

एनजीटी ने राज्य की नर्मदा नदी की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि इसे बचाने में सामूहिक विफलता सामने आई है। अमरकंटक से शुरू होकर यह राज्य के एक हजार किलोमीटर का सफर तय करती है। यह नदी राज्य में जल संसाधन का प्रमुख स्रोत है। इस नदी के किनारे शहरीकरण और औद्योगिकीकरण की वजह से इसका पानी सी कैटेगरी का हो चुका है। राज्य के 52 शहरों से अनट्रीटेड कचरा और सीवेज गिरने से नर्मदा का पानी प्रदूषित हो चुका है। होशंगाबाद में सबसे ज्यादा कचरा इस नदी में गिराया जाता है। इससे नर्मदा का पानी इस्तेमाल के लायक नहीं बचा है।

एनजीटी ने कहा कि मध्य प्रदेश के वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों में देश के टॉप टेन राज्यों में नौवें स्थान पर रखा गया है। एक अध्ययन के मुताबिक राज्य में होने वाली मौतों में 50 फीसदी मौतें वायु प्रदूषण की वजह से होती हैं। एनजीटी ने कहा कि राज्य का इंदौर शहर देश में भले ही सबसे साफ शहर चुना गया हो लेकिन यह शहर वायु और जल प्रदूषण की समस्या झेल रहा है ।

पिछली जनवरी में एनजीटी ने देश भर में ठोस कचरों के निस्तारण के लिए बने कानून सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 को लागू करने के दिशा निर्देश जारी किए थे। एनजीटी ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों से ठोस कचरे का निस्तारण नहीं करने पर नाराजगी जताते हुए निर्देश दिया था कि इसके प्रबंधन की समीक्षा करें। एनजीटी ने अपने कड़े निर्देश में कहा था कि मुख्य सचिव अपने बदले किसी दूसरे अधिकारी को नहीं भेज सकते हैं।

एनजीटी ने ठोस कचरे के निस्तारण के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और कमेटियों के चेयरपर्संस की भी नियुक्ति की थी। ये सभी चेयरपर्संस संबंधित राज्य के हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज या रिटायर्ड नौकरशाह हैं।


Share it
Top