चुनाव आयोग के बैन के बाद हनुमान चालीसा पढ़ने बजरंगबली के मंदिर पहुंचे योगी

चुनाव आयोग के बैन के बाद हनुमान चालीसा पढ़ने बजरंगबली के मंदिर पहुंचे योगी

नई दिल्ली। चुनाव आयोग की ओर से लगे प्रचार पर 72 घंटे के प्रतिबंध के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को हनुमान सेतु स्थित बजरंग बली के मंदिर में पूजा अर्चना की।

मुख्यमंत्री ने सुबह यहां पूरे विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की और हनुमान चालीसा का पाठ किया। वह मंदिर में करीब बीस मिनट तक रहे। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद मीडियाकर्मियों से कोई बात नहीं की और मुस्कुराते हुए चले गए। मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अशुतोष टंडन मौजूद रहे।

लखनऊ संसदीय सीट से भाजपा उम्मीदवार और केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने आज नामांकन दाखिल किया लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चुनाव आयोग की लगायी रोक के कारण इसमें शामिल नहीं हुए।

चुनाव आयोग ने आदर्श चुनाव आचार संहिता उल्लंघन मामलों में योगी आदित्यनाथ पर तीन दिन चुनाव प्रचार करने पर रोक लगायी है, जो आज सुबह छह बजे से शुरू हुई है। यह रोक उनके मेरठ की जनसभा में अली और बजरंग बली पर की गई टिप्पणी को लेकर लगायी गयी है। आयोग ने इसे आचार संहिता के उल्लंघन माना था। वहीं आयोग द्वारा इसे लेकर जारी किए गए कारण बताओ नोटिस के जवाब में योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उनकी अली और बजरंग बली टिप्पणी मायावती की देवबंद में मुस्लिम मतदाताओं की अपील के जवाब में दी गई थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने कभी भी धर्म और जाति के नाम पर वोट नहीं मांगे बल्कि यह काम विपक्ष ने किया है। उन्होंने कहा कि वह आयोग के प्रति पूर्ण सम्मान रखते हैं और आदर्श आचार संहिता के पालन के लिए प्रतिबद्ध हैं।

उन्होंने कहा कि उनके मेरठ में दिए भाषण पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाए तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि यह एक विपक्षी पार्टी की प्रमुख के बयान के संदर्भ में था। उन्होंने खुलेआम मुसलमानों से उनकी पार्टी के गठबंधन के पक्ष में वोट देने की अपील की थी। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश का एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते उनकी जिम्मेदारी बनती है कि ऐसी छद्म धर्मनिरपेक्षता का लोगों के सामने पर्दाफाश किया जाए। उन्होंने अपने भाषण में इसी को उजागर किया था।

योगी ने अपने जवाब में कहा है कि उन्होंने हरे वायरस शब्द का प्रयोग उस सोच, उस संकीर्ण स्तर की राजनीति के लिए किया गया है, जिसके तहत राजनीतिक लाभ के लिए चिरस्थापित मूल्यों को नजरअंदाज कर धर्म विशेष को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

इसके साथ ही योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बजरंग बली में उनकी अटूट आस्था है और किसी को बुरा लगे या कोई इससे अज्ञानतावश असुरक्षित महसूस करता है तो वह इस डर से अपनी इस आस्था को छोड़ नहीं सकते हैं। बजरंग बली उनके आराध्य हैं और हर शुभ कार्य के अवसर पर उनका स्मरण करते हैं।

वहीं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डाॅ. महेन्द्र नाथ पाण्डेय ने कहा है कि भाजपा एक अनुशासित राजनीतिक दल है और हम भारतीय निर्वाचन आयोग के हर निर्णय का सम्मान करते हैं। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहीं भी किसी भी प्रकार से न तो कहीं धार्मिक भावनाओं को भड़काने का काम किया और न ही धार्मिक उन्माद फैलाने वाला बयान दिया। बल्कि उन्होंने सिर्फ अपने आराध्य का नाम लिया है।

डाॅ. पाण्डेय ने कहा है कि दूसरी तरफ बसपा प्रमुख मायावती और सपा नेता आजम खां ने धार्मिक आधार पर वोट मांगा और वोटों के लिए धार्मिक उन्माद भी फैलाने का प्रयास किया। डाॅ. पाण्डेय ने निर्वाचन आयोग से अपील की है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर 72 घंटे के चुनाव प्रचार के प्रतिबंध लगाये जाने के अपने निर्णय पर पुर्नविचार करते हुए इसे समाप्त करें।

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