शहादत को सलाम: दस दिन की छुट्टी के बाद चार दिन पहले ही लौटे थे विजय मौर्य

शहादत को सलाम: दस दिन की छुट्टी के बाद चार दिन पहले ही लौटे थे विजय मौर्य


-पूरे गांव में किसी के घर नहीं जले चूल्हे, शहीद विजय अमर रहे, वंदे मातरम के लगे नारे

देवरिया। देश की सीमा की सुरक्षा में अपने जान की कुर्बानी देने वाले शहीद विजय कुमार मौर्य तीन भाईयों में सबसे छोटे थे। उनके शहीद होने की खबर मिलते देवरिया जिले में शोक की लहर दौड़ गयी। शहीद के पिता, पत्नी और चचेरे भाई, बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

मूल रूप से छपिया जयदेव के रहने वाले रामायन मौर्य किसान हैं। उनकी तीन संतानों में शहीद जवान विजय सबसे छोटे थे। बड़े भाई हरिओम मौर्य का पहले ही बीमारी के चलते निधन हो गया था, जबकि मंझले भाई अशोक मौर्य गुजरात में परिवार के साथ रहते हैं। बीए की परीक्षा पास करते ही विजय ने सीआरपीएफ ज्वाइन की थी लेकिन किसानी में पिता का हाथ बंटाने के लिए वह छुट्टी लेकर गांव आ जाते थे।

कश्मीर में 2014 से तैनात विजय दो फरवरी को दस दिनों की छुट्टी पर गांव आए हुए थे। नौ फरवरी को वह वापस ड्यूटी पर चले गए। गुरुवार को ड्यूटी स्थल कुपवाड़ा जाते समय आतंकी हमले में विजय शहीद हो गए। बेटे के शहीद होने की खबर मिलते ही परिवार में रोना-पिटना मच गया। पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। शहीद के गांव में किसी ने भी चूल्हा नहीं जलाया। ग्रामीणों ने शहीद विजय अमर रहे, वंदे मातरम के नारे लगाए।


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