महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं अकेले ट्रेन यात्रा, तीन साल में बलात्कार सहित 922 अपराध दर्ज


नई दिल्ली। रेलगाड़ियों में अलग से कम्पार्टमेंट आरक्षित करने और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के रक्षा और सुरक्षा के तमाम दावों के बावजूद महिलाओं के लिए ट्रेनों में अकेले यात्रा करना सुरक्षित नहीं है। इसका गवाही जीआरपी द्वारा चलती ट्रेनों में बलात्कार, छेड़छाड़ और उन पर हमले के दर्ज मामले दे रहे हैं।

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को लोकसभा में विक्रम उसेंडी और डॉ. बंशीलाल महतो के लिखित प्रश्नों का उत्तर देते हुए बताया कि जीआरपी ने रेलगाड़ियों में पिछले तीन सालों (2016, 2017 और 2018) के दौरान महिलाओं के साथ बलात्कार के 32, छेड़खानी के 856 और उन पर हमले के 34 मामलों सहित कुल 922 केस दर्ज किये।

उन्होंने बताया कि 2016 में बलात्कार के 7, 2017 में 10 और 2018 में 15 अपराध दर्ज किए। वहीं छेड़खानी में क्रमश: 279, 249 और 328 मामले दर्ज हुए। वहीं महिलाओं पर हमले के क्रमश: 13, 9 और 12 मामले दर्ज किए गए।

रेल मंत्री ने बताया कि रेलगाड़ियों में पुलिस की व्यवस्था करना राज्य सरकार का विषय है इसलिए रेल परिसरों और चलती गाड़ियों में अपराधों की रोकथाम करना, मामलों का पंजीकरण करना, उनकी जांच करना और कानून व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकारों का सांविधिक उत्तरदायित्व है जिसके निर्वहन वह राजकीय रेल पुलिस अथवा जिला पुलिस के जरिए करते हैं। बहरहाल रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) यात्रियों और यात्रा क्षेत्र की बेहतर रक्षा और सुरक्षा करने तथा उनसे जुड़े मुद्दों पर राजकीय रेलवे पुलिस के प्रयासों में सहायता करता है। रेलवे में अपराध संबंधी भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के मामले संबंधित राजकीय रेलवे पुलिस द्वारा पंजीकृत किए जाते हैं और उन्हीं के द्वारा जांच की जाती है। रेलवे भारतीय दंड संहिता के अपराधों का डाटा नहीं रखती है जब कभी रेलों पर अपराध की स्थिति के बारे में किसी सूचना की मांग की जाती है तो राज्य जीआरपी को सूचना मुहैया कराने के लिए अनुरोध किया जाता है।


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