जहरीली शराबकांड में दोषियों को हो सकती है मौत की सजा, सरकार ने साफ किया अपना रुख

जहरीली शराबकांड में दोषियों को हो सकती है मौत की सजा, सरकार ने साफ किया अपना रुख



विधानसभा में शून्य प्रहर में विपक्ष का हंगामा,

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के बहिर्गमन और हंगामे के बीच सरकार ने जहरीली शराब के मामले में साफतौर पर कहा है कि दोषियों को मौत की सजा भी हो सकती है। शून्य प्रहर में कार्य स्थगन प्रस्ताव के जरिये कांग्रेस के अजय कुमार लल्लू और बसपा के लालजी वर्मा ने यह मामला उठाते हुए कहा कि सहारनपुर और कुशीनगर के डीएम और एसएसपी को भी निलंबित किया जाना चाहिए। इनके खिलाफ भी आबकारी अधिनियम 60ए के तहत मुकदमा दर्ज होना चाहिए। सरकार की ओर से कोई पीड़ित परिवार से मिलने नहीं गया। सपा के संजय गर्ग का कहना था कि दो लाख रुपये के बजाय 25 लाख रुपये मुआवजा दिया जाना चाहिये। उच्च न्यायलय के जज की देखरेख में सीबीआई से जांच करानी चाहिए।

विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि मामले की जांच एसआईटी कर रही है। एसआईटी में दो मंडलायुक्त और दो पुलिस महानिरीक्षक शामिल हैं। दो पुलिस उपाधीक्षक समेत 10 से अधिक पुलिसकर्मी और दो जिला आबकारी अधिकारी समेत आठ आबकारी विभाग के कर्मचारी निलबिंत किये जा चुके हैं। सरकार इस मामले में गंभीर है। सहारनपुर में 36 और कुशीनगर में 8 मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये दिये जा चुके हैं। वहीं, गंभीर रूप से बीमार लोगों को 50 -50 हजार रुपये दिये गये हैं। वहीं, आबकारी अधिनियम की धारा 60ए के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है। उन्होंने कहा कि इसके तहत मौत की भी सजा हो सकती है।

सुरेश खन्ना ने कहा कि सरकार घटना की पुनरावृत्ति नहीं होने देगी। उन्होंने घटना का बड़ा कारण गरीबी और गलत सोसाइटी को बताया। उन्होंने कहा कि सपा-बसपा की सरकार में 2008 से 2017 तक 357 लोगों की मृत्यु जहरीली शराब से हुई थी। सरकार के जवाब से असंतुष्ट सपा-बसपा और कांग्रेस ने सदन का बहिर्गामन किया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार मामले में गंभीर नहीं है। इससे पहले कार्यवाही को प्रश्न प्रहर में भी स्थगित करना पड़ा।


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