गुर्जर आंदोलन जारी: धौलपुर में प्रदर्शनकारी हुए हिंसक: पुलिस के तीन वाहन फूंके, 4 पुलिसकर्मी चोटिल

गुर्जर आंदोलन जारी: धौलपुर में प्रदर्शनकारी हुए हिंसक: पुलिस के तीन वाहन फूंके, 4 पुलिसकर्मी चोटिल



जयपुर। राजस्थान में पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर किया जा रहा गुर्जर आंदोलन आज भरतपुर संभाग के धौलपुर में हिंसक हो गया और प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया तथा कुछ वाहनों को आग लगा दी।

आंदोलन के तहत धौलपुर में महापंचायत के बाद गुर्जर समाज के लोग राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या तीन पर एकत्रित हो गये और राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया। इससे मार्ग पर वाहनों की लम्बी लाइनें लग गई। पुलिस ने मार्ग खुलवाने के लिए प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े लेकिन आंदोलनकारी हिंसक हो गये पुलिस पर पथराव शुरु कर दिया। जवाब में पुलिस ने भी हवाई फायर तथा पथराव किया। प्रदर्शनकारी काबू में नहीं आये और पुलिस की तीन गाड़ियों को आग लगा दी।

गुर्जरों ने बूंदी के नैनवां तहसील में टोपा गांव के पास राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 148 डी को जाम कर दिया। पुलिस आंदोलनकारियों को खूब समझाया लेकिन वे नहीं माने और प्रदर्शन करना शुरु कर दिया। गुर्जर नेताओं के अनुसार सोमवार को बूंदी जिले में गुर्जर समाज दूध की सप्लाई नहीं करेगा।

आंदोलन के तहत करौली जिले में गुडला में हिन्डौन-करौली सड़क मार्ग आज दूसरे दिन भी जाम रहा। जिससे रोडवेज बसे एवं अन्य साधन बंद हैं और जयपुर आने में लोगों को परेशानी हो रही हैं। इसी तरह भीलवाड़ा जिले के आसींद में भी आंदोलनकारियों ने परासोली गांव के पास हाईवे को जाम कर दिया। मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया। हालांकि उदयपुरवाटी में कोटपूतली-जयपुर स्टेट हाईवे पर जाम दूसरे दिन रविवार को खोल दिया गया। गुर्जरों की सोमवार को दौसा के सिकंदरा तथा अजमेर जिले के नारेली में भी हाइवे जाम करने की रणनीति हैं।

गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के नेतृत्व में संभाग के सवाईमाधोपुर जिले के मलारना एवं निमोदा रेलवे स्टेशनों के बीच दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर शुक्रवार को पटरी पर पड़ाव शुरु किया जो रविवार को तीसरे दिन भी शांतिपूर्वक जारी रहा जहां बड़ी संख्या में महिलाएं भी ट्रेक पर पहुंची हैं।

श्री बैंसला ने फिर दोहराया कि सरकार से बात रेलवे ट्रैक पर ही होगी। उन्होंने कहा कि सरकार के मंत्री उनसे बात करने के लिए बिना मसौदे के आये थे। जब तक पांच प्रतिशत आरक्षण, क्रीमीलेयर की सीमा आठ लाख रुपए करने एवं पिछली भर्तियों को बैकलॉग से भरे जाने की मांग पूरी नहीं होती तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

उल्लेखनीय है कि गुर्जरों ने वर्ष 2006 में गुर्जरों को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग करते हुए आंदोलन की शुरुआत की और करौली जिले के हिंडौन में पटरियां उखाड़ दी गई थी। इसके बाद मई 2007 बूंदी जिले में पीपलखेड़ा पाटोली में सड़क मार्ग को रोका और हिंसक घटनाएं हुई जिसमें 28 लोग मारे गए। इसी तरह 23 मई 2008 में भरतपुर जिले के बयाना के पीलुकापुरा रेलवे ट्रैक रोका और प्रदर्शनकारियों के हिंसक होने पर सात लोग मारे गए। इसके दूसरे दिन दौसा जिले के सिकंदरा में हाईवे जाम किया और 23 लोग मारे गए।

उस दौरान राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा7 सरकार में पांच प्रतिशत विशेष पिछड़ा वर्ग (एसबीसी) आरक्षण पर सहमति बनी लेकिन मामला न्यायालय में अटक गया। फिर 24 दिसंबर 2010 में पीलुकापुरा में रेल रोकी गई। इसके बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार से पांच प्रतिशत आरक्षण पर समझौता हुआ लेकिन मामला न्यायालय में होने के कारण गुर्जरों को एक प्रतिशत आरक्षण दिया गया।

इसके बाद 21 मई 2015 में पीलुकापुरा में गुर्जरों ने फिर आंदोलन शुरु किया और तत्कालीन भाजपा सरकार ने गुर्जर सहित पांच जातियों को पांच प्रतिशत एसबीसी आरक्षण दिया। इससे कुल आरक्षण 54 प्रतिशत हो जाने पर इस पर न्यायालय ने रोक लगा दी। इस दौरान गुर्जर आरक्षण को लेकर आंदोलन के दौरान साढ़े सात सौ से अधिक मामले दर्ज हुए जिनमें से छह सौ से अधिक मामले वापस ले लिए गए।

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