समाज की निस्वार्थ सेवा करने वालों की नेटवर्किंग से मिलेगी न्यू इंडिया को गति

समाज की निस्वार्थ सेवा करने वालों की नेटवर्किंग से मिलेगी न्यू इंडिया को गति


नयी दिल्ली।संचार मंत्री मनोज सिन्हा ने देश के बदलाव के लिए जनशक्ति को श्रेय देते हुए शनिवार को कहा कि देश के लिए स्वांत: सुखाय एवं निस्वार्थ भावना से काम करने वाले लोगों काे एक मंच पर लाकर उनके सामूहिक बल से नये भारत की रचना को गति देना आवश्यक है।

श्री सिन्हा ने यहां विज्ञान भवन में एक स्वयंसेवी संस्था अष्टव्रत इंडिया फाउंडेशन की ओर से सामाजिक उद्यमिता एवं उसके माध्यम से समाज के विकास विषय पर संगोष्ठी को संबोधित करते हुए यह विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम में नीति आयोग के सदस्य एवं प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के प्रमुख डॉ विवेक देवराय, स्टार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी उदय शंकर और दिल्ली विश्वविद्यालय में फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ की डीन प्रो. सुनीता सिंह सेनगुप्ता भी मौजूद थीं।

श्री सिन्हा ने अष्टव्रत फाउंडेशन द्वारा देश भर में समाज की भलाई तथा गरीब कमजोर एवं जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए स्वेच्छा से काम करने वालों का नेटवर्क तैयार करने की पहल का स्वागत किया और उसकी सफलता की कामना की। उन्होंने कहा कि देश की तकदीर तकनीक है और तकनीक के माध्यम से लोगों को सशक्त करना, जोड़ना और उनकी सामूहिक ताकत को जागृत करना आसान हुआ है।

उन्होंने देश के ग्रामीण इलाकों में ऑप्टिक फाइबर केबल के माध्यम से दो लाख गांवों में कॉमन सर्विस सेंटर खोले जाने का उल्लेख किया और कहा कि इससे गांवों में लोगों को डिजिटल माध्यम से मिलने वाली सभी सरकारी सुविधाएं दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र से लेकर बैंकिंग सुविधायें तक इन सेंटरों में मिल रहीं हैं। देश में ऐसे पांच लाख सेंटर स्थापति करने की योजना है।

श्री सिन्हा ने कहा कि इसके माध्यम से देश 'मैं' से 'हम' की यात्रा की ओर अग्रसर है। देश में स्वांत: सुखाय की भावना से काम करने वालों की कोई कमी नहीं है क्योंकि ये हमारे देश की संस्कृति एवं जीवन मूल्य हैं। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु में एक आईटी प्रोफेशनल दिन में तीन घंटे कार को टैक्सी की तरह चलाता है और गरीब जरूरतमंदों को एक जगह से दूसरी जगह मुफ्त पहुंचाता है। छत्तीसगढ़ में एक महिला ने मंगलसूत्र बेच कर शौचालय बनवाया। सूरत में एक ऑटोचालक ने ऑटो के पीछे लिखवा रखा है कि मरीज को मुफ्त ले जाऊंगा। ऐसे असंख्य उदाहरण हैं। लोगों में भाव हैं, संस्कार हैं।

उन्होंने कहा कि देश में मिशन मॉड में काम करने वाले संगठन हैं। सामूहिकता की ताकत से बड़े से बड़े लक्ष्य हासिल किये गये हैं। इस तरह के लोग एवं संगठन तकनीक की ताकत का इस्तेमाल करके एक मंच पर लाये जायें आैर वे एक- दूसरे को पहचाने एवं समन्वय से काम करें तो देश में बड़े बदलाव संभव हैं और उसी से नये भारत का निर्माण होगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा के बाद लोगों की सहभागिता के कारण ही कामयाब हुआ है।

इस मौके पर श्री देवराय ने कहा कि देश में ऐसे कई उदाहरण हैं जब जनबल के दबाव में सरकारों ने न चाहते हुए भी नीतियां बनायीं हैं और उनसे बड़ा बदलाव आया है। उपभोक्ता संरक्षण कानून, पर्यावरण संरक्षण कानून, सूचना का अधिकार कानून आदि इसके उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे काम करने के लिए जुनून होना आवश्यक है। उन्होंने सामाजिक उद्यमिता को लेकर मुश्किलों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी उद्यमिता में समाज को होने वाले लाभ को मापने और परिभाषित करने का काम किया ही नहीं जाता है। इसका कोई मानदंड भी नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज को लाभ पहुंचाने वाले उपक्रम अधिकतर एक व्यक्ति द्वारा उसके जुनून एवं संकल्पशक्ति के कारण सफल होते हैं। उसे समूह में बांधना और व्यक्तियों को सामूहिक प्रयासों को उन्नत करना एक चुनौती है।

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