विश्वविद्यालयों में विभागवार रोस्टर पर अध्यादेश या विधेयक लाएगी सरकार: जावड़ेकर

विश्वविद्यालयों में विभागवार रोस्टर पर अध्यादेश या विधेयक लाएगी सरकार: जावड़ेकर


नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने शुक्रवार को संसद में कहा कि केन्द्रीय विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में संकाय भर्ती के विभागवार रोस्टर के विरोध में सुप्रीम कोर्सकी समीक्षा याचिका को खारिज कर देता है तो वह आरक्षित श्रेणी के हितों की रक्षा के लिए अध्यादेश या विधेयक लाएगी।

केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने राज्यसभा में रोस्टर के मुद्दे पर जवाब देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट में यदि समीक्षा याचिका मंजूर नहीं होती है तो सरकार के पास अध्यादेश या विधेयक लाने का विकल्प खुला है। उन्होंने कहा कि सरकार यह भी सुनिश्चित करेगी कि तब तक कहीं भी भर्ती की अनुमति नहीं दी जाएगी।

सप्ताह की शुरुआत से ही राज्यसभा में समाजवादी पार्टी(सपा), बहुजन समाज पार्टी(बसपा), राष्ट्रीय जनता दल(राजद) और वाम दल के सदस्य केन्द्रीय विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में संकाय की नियुक्ति में विभागवार रोस्टर लागू होने से अनुसूचित जाति(एससी), अनुसूचित जनजाति(एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग(ओबीसी) के अधिकारों के हनन का मुद्दा उठाकर हंगामा कर रहे थे। विपक्षी सदस्य 13 प्वाइंट रोस्टर के खिलाफ संसद के इसी सत्र में सरकार से बिल लाने की मांग पर अड़े थे।

आज भी सदन में मनोज कुमार झा, मीसा भारती, डी. राजा, रवि प्रकाश वर्मा, जावेद अली खान, अशोक सिद्धार्थ और संजय सिंह ने रोस्टर पर सदन में नियम-267 के तहत चर्चा का नोटिस दिया था। इस पर केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के बयान के बीच भी असंतुष्ट विपक्षी सदस्य हंगामा करते रहे।

सूचीबद्ध आधिकारिक पत्रों को सदन में पेश किए जाने के तुरंत बाद जावड़ेकर ने कहा कि हमने 30 विश्वविद्यालयों का केस स्टडी करके देखा कि यदि अभी विभागवार रोस्टर लागू करेंगे तो कैसे एससी, एसटी और ओबीसी के साथ अन्याय होता है। इसके बारे में हमने पूरा विश्लेषण किया है। उन्होंने कहा कि सरकार हमेशा सामाजिक न्याय के पक्ष में है। रिव्यू पिटीशन खारिज होने की स्थिति में अध्यादेश, ऑर्डिनेंस या बिल जो भी है, उसे लाने का हमने फैसला किया है।

इससे पहले गुरुवार को भी सदन में जब यह मुद्दा उठा था उस समय प्रकाश जावड़ेकर ने विपक्षी सदस्यों को भरोसा दिलाते हुए कहा था कि यूनिवर्सिटी में विभागवार आरक्षण सुप्रीम कोर्ट के आदेश से आया है। कोर्ट का यह आदेश हमें मंजूर नहीं था इसलिए हम उसके खिलाफ कोर्ट में समीक्षा याचिका दायर करेंगे और हमें पूरा विश्वास है की समीक्षा याचिका में न्याय होगा। हालांकि विपक्षी सदस्य मंत्री के इस बयान से संतुष्ट नहीं हुए थे और वह बिल लाने की मांग पर अड़े हुए थे।


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