छात्रवृत्ति घोटाला: कानपुर की अपराध शाखा ने इटावा के 65 कॉलेजों पर दर्ज कराए मुकदमे..कागजों में चलाए जा रहे थे 38 कॉलेज

छात्रवृत्ति घोटाला: कानपुर की अपराध शाखा ने इटावा के 65 कॉलेजों पर दर्ज कराए मुकदमे..कागजों में चलाए जा रहे थे 38 कॉलेज


कानपुर। उत्तर प्रदेश के इटावा जनपद के स्कूलों में छात्रवृत्ति के नाम पर बड़ा घोटाला सामने आया है। मामला सामने आने पर आर्थिक अपराध शाखा कानपुर यूनिट ने इटावा के 65 स्कूलों के प्रधानाचार्य व प्रबंधक समेत शिक्षा विभाग व योजनाओं से जुड़े विभागों के अधिकारियों के खिलाफ छात्रवृत्ति घोटाले का मुकदमा दर्ज किया है। इन स्कूलों ने करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति हजम कर ली। आर्थिक अपराध शाखा, कानपुर ने इटावा में हुए छात्रवृत्ति घोटाले में दो एफआईआर दर्ज करते हुए 154 लोगों को नामजद किया है।

इस सम्बंध में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) कानपुर यूनिट के पुलिस अधीक्षक बाबूराम ने बताया कि यह एफआईआर दो फरवरी को वर्ष 2008-09 में इटावा में हुए 14.61 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले में आरोपियों के खिलाफ की गई है। एफआईआर में इटावा की तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी इंद्रा सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी, सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी अजय प्रताप सिंह, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, नगर शिक्षा अधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी के पटल सहायक और 50 से अधिक स्कूलों के प्रबंधक व प्रधानाचार्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

एसपी ईओडब्ल्यू ने बताया कि इटावा में शैक्षिक सत्र 2008-09 के दौरान कक्षा एक से 10 तक के अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग, सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं की अलग-अलग स्कूलों में फर्जी संख्या दर्शा कर छात्रवृत्ति घोटाला किए जाने की बात सामने आई थी। इस मामले में 6 मई 2010 को शासन ने ईओडब्ल्यू को जांच सौंपी थी। जांच के दौरान बड़े पैमाने पर इसमें घोटाले की पुष्टि हुई और स्कूलों और विभागीय अधिकारियों ने मिलकर करोड़ों रुपये का बंदरबांट कर लिया।

इस घोटाले में खास बात यह है कि 65 कॉलेजों में 27 कॉलेज तो भवनों में संचालित थे, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि 38 कॉलेज बिना भवनों के कागजों में चलाये जा रहे थे, यानि की यह कॉलेज जमीन पर ही नहीं थे। इसमें विभागीय अफसरों से लेकर प्रबंधकों तक का पूरा नेटवर्क या यूं कहे कि एक गिरोह चलाया जा रहा था।


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