दरोगा खुदकुशी प्रकरण: देवबंद के कोतवाली प्रभारी अभिषेक सिरोही का हुआ तबादला, मुनेंद्र सिंह बने नए कोतवाली प्रभारी

दरोगा खुदकुशी प्रकरण: देवबंद के कोतवाली प्रभारी अभिषेक सिरोही का हुआ तबादला, मुनेंद्र सिंह बने नए कोतवाली प्रभारी


सिरोही को सहारनपुर कुतुबशेर का थाना प्रभारी बनाया गया

जो भी जांच में निष्कर्ष सामने आएगा, उसके मुताबिक वह कार्रवाई करेंगे : एसएसपी सहारनपुर दिनेश कुमार पी

इस खुदकुशी प्रकरण से पूरे पुलिस महकमे में अभी भी हड़कंप मचा है और तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं

पुलिस में काम का इतना बोझ नहीं है, जितना प्रचारित किया जाता है, यह सही है कि मैन्यूअल काम ज्यादा है, साथ ही पुलिस के कर्मचारियों की महत्वकाक्षांए भी बेतहाशा बढ़ी हैं, यह भी आत्महत्या की प्रमुख वजह है : सेवानिवृत्त पुलिस उपमहानिरीक्षक डा. अशोक कुमार राघव

देवबंद (गौरव सिंघल)। देवबंद कोतवाली की रणखंडी पुलिस चौकी के उपनिरीक्षक कुलदीप सिंह 32 वर्ष के आत्महत्या मामले की जांच एसएसपी दिनेश कुमार पी ने एसपी देहात विद्यासागर मिश्र को सौंपी है। एसएसपी ने देवबंद कोतवाली के प्रभारी अभिषेक सिरोही को यहां से हटाकर सहारनपुर कुतुबशेर के थाना प्रभारी के पद पर भेज दिया है। जबकि थाना कुतुबशेर थाना प्रभारी मुनेंद्र सिंह को देवबंद का नया कोतवाली प्रभारी बनाया गया है।

सीओ देवबंद सिद्धार्थ ने आज बताया कि 31 जनवरी की सुबह दरोगा कुलदीप सिंह के खुदकुशी किए जाने के संबंध में सोशल मीडिया पर दो वीडियो वायरल हुए थे। जिनकी वह जांच कर रहे हैं। इन वीडियो और कुलदीप के कमरे से मिले सुसाइड नोट में कुलदीप ने काम के बोझ और उत्पीड़न को खुदकुशी किए जाने की वजह बताया है।

कुलदीप पुत्र अशोक कुमार मेरठ के थाना कंकड़खेड़ा क्षेत्र का निवासी था। वह पुलिस ट्रेनिंग के बाद चार माह पूर्व देवबंद कोतवाली में तैनात किया हुआ था। पूरे प्रकरण की जांच के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आ पाएगी। लेकिन एसएसपी दिनेश कुमार पी ने आज स्पष्ट कहा कि जो भी जांच में निष्कर्ष सामने आएगा, उसके मुताबिक वह कार्रवाई करेंगे। इस खुदकुशी प्रकरण से पूरे पुलिस महकमे में अभी भी हड़कंप मचा है और तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। लेकिन आन दि रिकार्ड कोई कुछ भी कहने से बच रहा है। देखने में आया है कि हाल के दिनों में यूपी पुलिस ने सिपाही से लेकर एसपी तक ने आत्महत्या की है।

सेवानिवृत्त पुलिस उपमहानिरीक्षक डा. अशोक कुमार राघव का कहना है कि यह रूझान पुलिस विभाग के लिए अच्छा नहीं है। वह कहते हैं कि पुलिस में काम का इतना बोझ नहीं है, जितना प्रचारित किया जाता है। यह सही है कि मैन्यूअल काम ज्यादा है। साथ ही पुलिस के कर्मचारियों की महत्वकाक्षांए भी बेतहाशा बढ़ी हैं। यह भी आत्महत्या की प्रमुख वजह है। वह कहते हैं कि हर स्तर पर संवेदनशीलता और मातहतों की सुनवाई को प्रोत्साहित किया जाने की भी आवश्यकता है।

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