बेरोजगारी चार दशक के उच्च स्तर पर..मोदी सरकार में 53% घट गईं..!

बेरोजगारी चार दशक के उच्च स्तर पर..मोदी सरकार में 53% घट गईं..!

नोटबंदी के बाद देश में बेरोजगारी चार दशक के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (एनएसएसओ) के आंकड़ों से ये बात सामने आई है।

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन(एनएसएसओ) के ताजा आंकड़ों को मोदी सरकार ने छिपा लिया है। इस रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत में नोटबंदी के बाद बेरोजगारी चार दशक के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। 15-29 आयु वर्ग के ग्रामीण पुरुषों में बेरोजगारी की दर 2011-12 में 5 प्रतिशत की तुलना में 2017-18 में तीन गुना से अधिक होकर 17.4 प्रतिशत हो गई। इसी अवधि में ग्रामीण महिला-युवतियों की बेरोजगारी दर 4.8 प्रतिशत की तुलना में 13.6 प्रतिशत थी। शिक्षित युवाओं का बेरोजगारी स्तर ग्रामीण और शहरी दोनों में ही उच्च स्तर पर दर्ज किया गया है। बजट भाषण में युवा और नौकरी का जिक्र तो 4-4 बार हुआ, पर नई घोषणा कोई भी नहीं हुई है।

इससे स्पष्ट है कि मोदी सरकार इस जानकारी को सार्वजनिक डोमेन तक पहुंचने से रोक रही है। इसके परिणामस्वरूप संवैधानिक संस्था राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के दो सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया। इसमें कार्यवाहक अध्यक्ष भी शामिल हैं। इससे पहले मोदी सरकार ने लेबर ब्यूरो के 2016-17 के वार्षिक सर्वेक्षण को जारी करने से इनकार कर दिया था।

मोदी सरकार द्वारा आंकड़ों को छिपाने से स्पष्ट है कि उसकी नीतियों के कारण जनता दुखी है। देश का युवा हमारी संपत्ति है और वह अब बर्बाद हो रहा है। यह भाजपा की अगुवाई वाली सरकार द्वारा हर साल दो करोड़ नौकरियां देने के वादे की विफलता को दर्शाता है, यानी पिछले पांच वर्षों के दौरान दस करोड़ नई नौकरियां अर्जित होनी चाहिए थीं। युवाओं को सालाना 1 करोड़ नौकरी देने के वादे के साथ मोदी सरकार सत्ता में आई थी। इसे पूरा करने का रास्ता प्रभावी शिक्षा, रोजगार के मौके और स्किल के जरिए आसान होता है। यूपीए-2 की तुलना में अब नई नौकरियां 53% तक घट गई हैं।

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