एनएसए अजीत डोभाल के बेटे विवेक डोभाल ने कोर्ट में दर्ज कराया बयान, कहा-मैं कांग्रेस के लिए सॉफ्ट टारगेट था

एनएसए अजीत डोभाल के बेटे विवेक डोभाल ने कोर्ट में दर्ज कराया बयान, कहा-मैं कांग्रेस के लिए सॉफ्ट टारगेट था


नई दिल्ली। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल के बेटे विवेक डोभाल की कांग्रेस नेता जयराम रमेश और कारवां मैगजीन के खिलाफ आपराधिक मानहानि के मामले में पटियाला हाउस कोर्ट में अपने बयान दर्ज कराए। मामले की अगली सुनवाई 11 फरवरी को होगी। उस दिन दूसरे गवाहों के बयान दर्ज होंगे।

विवेक डोभाल ने कहा कि वे एक ब्रिटिश नागरिक होने के साथ-साथ भारत के ओवरसीज सिटिजन भी हैं। उन्होंने अपनी बीएससी और एमएससी की डिग्री लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से और सीएफए की डिग्री अमेरिका से हासिल की थी। उन्होंने कहा कि हमने ये याचिका आरोपितों के खिलाफ उनके मानहानि वाले आरोपों के खिलाफ दायर की है। विवेक डोभाल ने कहा कि 17 जनवरी को उनके पिता अजीत डोभाल ने कारवां मैगजीन में छपे आलेख की सच्चाई के बारे में पूछा। इससे मैं काफी दुखी हुआ, क्योंकि मैंने हमेशा प्रोफेशनल तरीके से काम किया है।

विवेक डोभाल ने कहा कि आलेख का शीर्षक डी कंपनी था और उसमें मेरे पिताजी की तस्वीर छपी थी। आलेख में मेरे परिवार और पिताजी पर सवाल उठाए गए हैं। आलेख में मेरे उपक्रम जीएनवाई एशिया फंड पर मनी लांड्रिंग का आरोप लगाया गया है। आलेख में कहा गया है कि 8300 करोड़ रुपये का काला धन भारत लाया गया। इस आलेख से मेरे करियर और मेरे बिजनेस को काफी नुकसान हुआ। मेरी छवि धूमिल करने की कोशिश की गई।

उन्होंने कहा कि 17 जनवरी को कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रेस कांफ्रेंस कर आधारहीन आरोप लगाए। मुझे एक सॉफ्ट टारगेट बनाया गया जबकि असली टारगेट मेरे पिता हैं।

पिछले 22 जनवरी को कोर्ट ने याचिका पर संज्ञान लिया था। विवेक डोभाल ने अपने वकील डीपी सिंह के जरिए कोर्ट से कहा था कि कारवां मैगजीन ने अपने लेख में डी कंपनी का जिक्र किया है, जिसका मतलब दाऊद इब्राहिम गैंग होता है। डीपी सिंह ने कहा था कि लेखक कौशल श्राफ ने छापने के पहले कोई पड़ताल नहीं की। इस लेख के जरिए हमारे परिवार को टारगेट किया जा रहा है। उन्होंने कहा था कि अगर परिवार को बदनाम करने की कोशिश नहीं की गई है तो आलेख में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के चित्र छापे गए हैं और डी कंपनी कहा गया है।

डीपी सिंह ने कहा था कि लेख में जयराम रमेश के प्रेस कांफ्रेंस का जिक्र है, जिसके बाद ट्विटर पर काफी चर्चा हुई। ये पूरे तरीके से बदनाम करने की कोशिश की गई।

याचिका में कहा गया है कि विवेक डोभाल और अमित शर्मा कैमरन आइलैंड नामक हेज फंड के डायरेक्टर हैं। याचिका में कहा गया है कि जयराम रमेश और कारवां मैगजीन ने उनके खिलाफ झूठे बयान दिए और छापे हैं। ये बयान उनके पिता अजीत डोभाल की छवि को धूमिल करने के लिए दिए गए। याचिका में कहा गया है कि जयराम रमेश ने अपने बयानों के जरिए उनकी और उनकी हेज फंड कंपनी के खिलाफ मनी लांड्रिंग के आरोप लगाए हैं। इन बयानों से उनकी वर्षों के मेहनत से अर्जित प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।

याचिका में कहा गया है कि कारवां मैगजीन ने अपने आलेख में उनकी कंपनी को डी कंपनी कहकर संबोधित किया है और उनकी कंपनी को बदनाम करने की कोशिश की है।

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