इंदिरा गांधी भी डरती थीं जॉर्ज फर्नांडीस की आक्रामकता से : संजय राउत

इंदिरा गांधी भी डरती थीं जॉर्ज फर्नांडीस की आक्रामकता से  : संजय राउत


मुंबई। शिवसेना नेता संजय राउत ने पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि जॉर्ज फर्नांडीस की आक्रामकता से पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी डर गई थीं और उन्होंने देश में आपातकाल लगा दिया था। लेकिन निडर व्यक्तित्व के धनी जॉर्ज ने जेल में बंद होकर बहुत यातनाएं सही, लेकिन आंदोलन का रास्ता नहीं छोड़ा।

संजय राउत ने कहा कि जॉर्ज फर्नांडीस लडाकू, बिंदास प्रवृत्ति के नेता थे। स्व. शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे के साथ उनका नजदीकी संबंध था। बाला साहेब ठाकरे और जॉर्ज फर्नांडीस मंच पर भले ही एक-दूसरे के पर तीखे आरोप-प्रत्यारोप करते थे, लेकिन विकास कार्यों में बाला साहेब ठाकरे और जॉर्ज एक साथ रहते थे। बाला साहेब ठाकरे जब गिरफ्तार होकर जेल में थे तो उनसे मिलने के लिए जॉर्ज फर्नांडीस जेल में गए थे। बाला साहेब ठाकरे महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा का प्रश्न धारदार तरीके से रख रहे थे, लेकिन कर्नाटक के होते हुए भी जॉर्ज फर्नांडीस ने इस मुद्दे पर बाला साहेब ठाकरे का साथ दिया था। 1974 में रेल कर्मचारियों के लिए जॉर्ज फर्नांडीस की ओर से किया गया आंदोलन ऐतिहासिक हो गया| डायनामाइट प्रकरण के बाद इंदिरा गांधी भी उनसे डरने लगी थीं। इसी वजह से इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगा दिया था। जॉर्ज फर्नांडीस को हिंदी, अंग्रेजी, मराठी सहित 12 भाषाओं का व्याकरण सहित शुद्ध ज्ञान था। ठाकरे सिनेमा में भी उन्होंने इनका समावेश किया है। संजय राउत ने बताया कि वह जॉर्ज फर्नांडीस पर भी फिल्म बनाएंगे।

कम्युनिस्ट पार्टी के नेता डी.एल. कराड ने कहा कि जॉर्ज फर्नांडीस को कामगार कभी नहीं भूलेंगे। जॉर्ज फर्नांडीस आजीवन कामगार वर्ग, कमजोर वर्ग, रेलवे कर्मचारियों के लिए आंदोलन करते रहे। उनके आंदोलनों की वजह से बहुराष्ट्रीय कंपनियों को बहुत नुकसान हुआ है। जॉर्ज फर्नांडीस के निधन से कामगार आंदोलन की अपूरणीय क्षति हुई है।

सीपीएम नेता सुबोध मोरे ने पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वे मुंबई में कामगारों के मन में समाए हुए हैं। उन्होंने मुंबई में अपने जीवन की शुरुआत कर्मचारियों को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन के रुप में की थी, जिसे आजीवन जारी रखा। खुद समाजवादी के रुप में राम मनोहर लोहिया के वे कट्टर समर्थक थे। कामगारों के हित के लिए लड़ते हुए ही उन्हें 'बंद सम्राट' की उपाधि दी गई थी। 8 मई 1994 से 15 मई 1994 तक पूरे भारत में भारतीय रेलवे की हड़ताल कर उन्होंने इतिहास रच दिया था। जॉर्ज फर्नांडीस की मुंबई में आंदोलन की विरासत उनके अनुचर शरद राव व सोहन सिंह कोहली ने संभाला था।

मुंबई टैक्सी मैन्स यूनियन के अध्यक्ष ए.एल. क्वाड्रोस ने जॉर्ज फर्नांडीस को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वे महान व्यक्ति थे। उनके जैसा व्यक्तित्व फिर से पैदा नहीं हो सकता। मुंबई के कामगारों की वे सांस थे।


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