कोयला खदान में फंसे मजदूरों पर मेघालय सरकार ने दाखिल की स्टेटस रिपोर्ट

कोयला खदान में फंसे मजदूरों पर मेघालय सरकार ने दाखिल की स्टेटस रिपोर्ट


कहा, बंद नहीं किया बचाव कार्य, सुरंग काफी संकरा होने से आ रही दिक्कत

नई दिल्ली। मेघालय की कोयला खदान में फंसे मजदूरों को बचाने के मामले पर आज मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल किया। मेघालय सरकार ने कहा है कि उसने अभी बचाव कार्य बंद नहीं किया है। राज्य सरकार ने कहा कि 210 फीट की गहराई में एक शव बरामद किया गया। जिस व्यक्ति का शव बरामद किया गया वह शर्ट और जींस पहने हुए था। ऐसी आशंका है कि अगर उसे बाहर निकाला गया तो शव नष्ट हो जाएगा क्योंकि सुरंग काफी संकरा है। उस शव के आसपास और शव होने की संभावना है। सुनवाई के दौरान केंद्र और राज्य सरकार दोनों ने कहा कि वे बचाव अभियान जारी रखेंगे।

पिछले 11 जनवरी को कोर्ट ने खदान में फंसे मज़दूरों को बचाने के लिए समन्वित प्रयास करें। जस्टिस एके सिकरी की अध्यक्षता वाली बेंच ने सभी बल और राज्य के संसाधन को खदान में फंसे हुए मजदूरों को बचाने के लिए काम करने का निर्देश दिया था।

सुनवाई के दौरान जस्टिस सिकरी ने कहा था कि बचाव अभियान जारी रखें, हो सकता है कि सभी मजदूर या उनमें से कुछ बचे हों। कोई भी चमत्कार हो सकता है।

जस्टिस सिकरी ने पूछा था कि जिन अफसरों ने अवैध खनन होने दिया उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई। हम इस नजरिए से भी मामले को देख रहे हैं। लेकिन फिलहाल बचाव कार्य पर फोकस करने की जरूरत है।

पहले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि 13 दिसंबर को जब लोग फंसे थे, तभी इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया था कि ये पूरा एरिया 5 वर्ग किलोमीटर का है। नेवी के स्पेशल गोताखोर को भी लगाया है, लेकिन दिक्कत ये है कि पास में ही नदी है| हम लगातार पानी निकाल रहे हैं| किर्लोस्कर पम्प लगाए गये हैं। पंप 1800 लीटर पानी हर मिनट निकाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि 12 डाइवर और बाकी टेक्निकल स्टाफ लगा हुआ है, पर उन्हें हर रैट होल में जाना पड़ रहा है । तब कोर्ट ने कहा था कि आप अवैध खनन माफिया पर एक्शन लीजिए लेकिन गरीब मजदूर क्यों परेशानी झेलें।

पिछले 3 जनवरी को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ये तक नहीं पता कि वो लोग जीवित हैं या नहीं। कोर्ट ने कहा था कि केंद्र-राज्य के बीच तालमेल से काम करने की जरूरत है। भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने की स्पष्ट नीति होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को ये बताने का निर्देश दिया था कि मेघालय की कोयला खदान में फंसे 15 लोगों को निकालने के लिए क्या किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 1-1 सेकंड कीमती है। जरूरत पड़े तो सेना की मदद ली जाए। अगर थाईलैंड में हाई पावर पंप भेजे जा सकते हैं तो मेघालय में क्यों नहीं।

याचिका वकील आनंद ग्रोवर ने दायर की है। मेघालय की लुमथरी की कोयला खदान में पिछले 13 दिसंबर से 15 मजदूर खदान में फंसे हुए हैं।


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