लोकसभा चुनाव के साथ झारखंड, हरियाणा व महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होने पर भाजपा को फायदा !

लोकसभा चुनाव के साथ झारखंड, हरियाणा व महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होने पर भाजपा को फायदा !


नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के साथ झारखंड, हरियाणा व महाराष्ट्र विधानसभाओं के चुनाव हुए तो भाजपा को फायदा होगा या नुकसान इसको लेकर पार्टी में आंतरिक रायशुमारी व विमर्श हो रहा है। यदि लोकसभा चुनाव के साथ इन राज्यों के विधानसभा चुनाव कराने से मोदी की साख के चलते तीनों राज्यों में भी भाजपा की फिर से जीतने, सरकार बनने की उम्मीद बनेगी, तब तो जिस तरह तेलंगाना में टीआरएस ने किया उसी तरह से भाजपा इन तीनों राज्यों में भी समय से पहले विधानसभा चुनाव (लोकसभा चुनाव के साथ ) कराने का आग्रह चुनाव आयोग से करेगी। इस बारे में भाजपा सांसद लालसिंह बड़ोदिया का कहना है कि उक्त तीनों राज्यों में विधानसभा चुनाव समय से 5 से 7 माह पहले कराने से पार्टी को फायदा होने की संभावना है। लोकसभा चुनाव में जनता नरेन्द्र मोदी के नाम पर वोट देगी और चुनाव प्रचार के दौरान उक्त तीनों राज्यों में नरेन्द्र भाई केन्द्र सरकार द्वारा किये गये कार्यों को गिनाएंगे। इससे राज्य की सत्ताधारी नेताओं से नाराज जनता उसे भूलकर नरेन्द्र मोदी का मुंह देखकर भाजपा को वोट देगी।

इस तरह लोकसभा चुनाव के साथ तीनों राज्यों में भी भाजपा की जीत हो जाएगी। उक्त तीनों राज्यों के विधानसभा चुनाव यदि पांच वर्ष पूरा होने पर अक्टूबर व दिसम्बर में हुए, तब भाजपा को नुकसान हो सकता है। एक या दो राज्य हाथ से निकल सकते हैं। इसलिए जोर उन तीनों राज्यों के चुनाव भी लोकसभा चुनाव के साथ कराने का है। लेकिन इस पर अंतिम निर्णय भाजपा आलाकमान को ही करना है। इस बारे में झारखंड भाजपा के एक नेता का नाम नहीं छापने की शर्त पर कहना है कि राज्य में विपक्षी दल एकजुट हो रहे हैं। ऐसे में यदि झारखंड में विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ नहीं हुआ, तो पार्टी चुनाव हार सकती है। यदि लोकसभा के साथ हुआ तब जीतने की कुछ संभावना है। इस बारे में पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता के अनुसार सबसे बड़ा खतरा यह है कि लोकसभा चुनाव के साथ झारखंड विधानसभा का चुनाव हुआ, तो राज्य की सत्ता विरोधी रूझान के कारण लोकसभा के मतों को भी नुकसान हो सकता है। यही स्थित हरियाणा व महाराष्ट्र में भी है। इसलिए पार्टी में इसको लेकर अभी मंथन चल रहा है। इससे संबंधित आंतरिक सर्वे के आधार पर फरवरी के दूसरे सप्ताह में विचार-विमर्श होगा। उसके बाद निर्णय होगा कि उक्त तीनों राज्यों में समय से पहले विधानसभा चुनाव कराना चाहिए या नहीं। यदि रिपोर्ट व बहुमत साथ चुनाव के पक्ष में होगा, तो चुनाव आयोग से इसके लिए आग्रह किया जाएगा।

इधर लोकसभा चुनाव की घोषणा मार्च के पहले हफ्ते के अंत में किये जाने की संभावना है। पूर्व सांसद हरिकेश बहादुर का कहना है कि चुनाव आयोग ने 2004 में लोकसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा 29 फरवरी को, 2009 में 2 मार्च को तथा 2014 में 5 मार्च को की थी। तीनों लोकसभा चुनाव में मतदान कई चरणों में अप्रैल में शुरू होकर मई के दूसरे सप्ताह में खत्म हुए थे। इसलिए आगामी लोकसभा चुनाव की घोषणा मार्च के प्रथम सप्ताह में किये जाने की संभावना है। इस बारे में चुनाव आयोग के सूत्रों का भी यही संकेत है। हिन्दुस्थान समाचार/ कृष्णमोहन/राधा रमण

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