हेराल्ड हाउस को खाली करने के सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई 28 तक टली

हेराल्ड हाउस को खाली करने के सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई 28 तक टली



नई दिल्ली। दिल्ली के आईटीओ स्थित हेराल्ड हाउस को खाली करने के हाईकोर्ट के सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट ने आज सुनवाई टाल दी है। चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन की आज तबियत खराब थी, जिसकी वजह से उन्होंने सुनवाई टाल दी। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 28 जनवरी को होगी।

एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) ने दिल्ली के हेराल्ड हाउस को खाली करने के दिल्ली हाईकोर्ट के सिंगल बेंच के फैसले को डिवीजन बेंच में चुनौती दी है। 21 दिसम्बर, 2018 को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को दो हफ्ते के भीतर हेराल्ड हाउस को खाली करने का आदेश दिया था।

केंद्र सरकार ने 30 अक्टूबर, 2018 को हेराल्ड हाउस खाली करने के लिए 15 नवम्बर, 2018 तक का समय दिया था। एजेएल ने केंद्र सरकार के इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के समक्ष याचिका दायर की थी । याचिका में कहा गया था कि केंद्र सरकार का ये फैसला राजनीति से प्रेरित है। भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की नेहरूवादी नीतियों के विरोध की वजह से ये फैसला किया गया है।

नेशनल हेराल्ड से संबंधित एक और मामला पटियाला हाउस कोर्ट में चल रहा है। पटियाला हाउस कोर्ट में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने याचिका दायर कजेएल नेशनल हेराल्ड अखबार की मालिकाना कंपनी है । कांग्रेस ने 26 फरवरी, 2011 को इसकी 90 करोड़ रुपये की देनदारियों को अपने जिम्मे ले लिया था। इसके बाद 5 लाख रुपये से यंग इंडियन कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी की 38-38 फीसदी हिस्सेदारी है। बाकी की 24 फीसदी हिस्सेदारी कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीज के पास है। इसके बाद एजेएल के 10-10 रुपये के नौ करोड़ शेयर नयी बनायी कंपनी यंग इंडियन को दे दिए गए। इसके बदले यंग इंडियन को कांग्रेस का लोन चुकाना था। नौ करोड़ शेयर के साथ यंग इंडियन को इस कंपनी के 99 फीसदी शेयर हासिल हो गए। इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने 90 करोड़ का लोन भी माफ कर दिया। यानी यंग इंडियन को एजेएल का स्वामित्व मिल गया।


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