विपक्ष का मुंह बंद करने की तैयारी, ईवीएम के साथ जुड़ेगी वीवीपैट मशीन, जानिए वीवीपैट में क्या है खासियत


गुरुग्राम। लोकसभा चुनाव की सुगबुगाहट के साथ साथ प्रशासनिक तौर पर मंगलवार को तैयारियां भी शुरू हो गई है। इस बार चुनाव में वीवीपैट यानि की वैरिफाईड पेपर ऑडिट ट्रेल मशीन का प्रयोग ईवीएम के साथ किया जाएगा। वीवीपैट मशीन पर बटन दबाते ही यह सामने आ जाएगा कि वोट किस प्रत्याशी को दी गई है। समझा जा रहा है कि विपक्ष बार बार इवीएम मशीन में छेड़छाड़ का आरोप लगाता आ रहा है उसका भी मुंह बंद करने की तैयारी है।

ईवीएम से जुड़ी होगी वीवीपैट मशीन

बताते चलें कि यह वीवीपैट मशीन ईवीएम के साथ जुड़ी होगी। तहसीलदार संतलाल ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि अबकि बार जो ईवीएम आई है, वे एम थ्री माॅडल की हैं जिनका आकार पहले वाली ईवीएम से छोटा है और वजन में ये मशीन उनसे हल्की भी हैं। उन्होंने बताया कि वीवीपैट के प्रयोग से मतदाता को यह फीडबैक मिलेगा कि उसने जिस प्रत्याशी को वोट देने के लिए बटन दबाया था, क्या वोट उसी प्रत्याशी को डला है। इससे मतदाता के मन अथवा दिमाग में कोई शक या संशय नही रहेगा और उसका देश की प्रजातांत्रिक प्रणाली में विश्वास सुदृढ़ होगा।

अधिकारियों को दी गई वीवीपैट की ट्रेनिंग

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा लिए गए निर्णय अनुसार इस वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव में शत-प्रतिशत बूथों पर वीवीपैट मशीन का प्रयोग होगा। इस दिशा में गुरूग्राम जिला में मंगलवार को जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा तैयारियों भी शुरू कर दी गई हैं। आज लघु सचिवालय के सभागार में जिला अधिकारियों के लिए वीवीपैट मशीन के संचालन का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

7 सेकेंड में पता लगेगा किस प्रत्याशी को गई वोट

गुरुग्राम के चुनाव अधिकारी तहसीलदार संतलाल ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने चुनाव में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए वोटर वैरिफाईड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) मशीन का प्रयोग करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि कोई भी वोटर जब अपना वोट इलैक्ट्राॅनिक वोटिंग मशीन में बटन दबाकर डालेगा तो उसके अगले सात सैकेण्ड तक वीवीपैट मशीन पर यह नजर आएगा कि उसका वोट किस प्रत्याशी को डला है। उन्होंने बताया कि इसकी एक रसीद भी कटकर वीवीपैट मशीन के अंदर ही एकत्रित होगी, जिसकी गणना बाद में मतगणना के समय यह सुनिश्चित करने के लिए होगी कि उस ईवीएम के माध्यम से जितने वोट डाले गए हैं, क्या रसीदों की संख्या उतनी ही है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लिया गया वीवीपैट का निर्णय

उल्लेखनीय है कि वीवीपैट मशीन को भारत इलैक्ट्राॅनिक्स लिमिटिड और इलैक्ट्राॅनिक कार्पोरेशन आफ इंडिया लिमिटिड ने सन 2013 में डिजाईन किया था। सबसे पहले इसका इस्तेमाल नागालैंड के चुनाव में सन 2013 में हुआ। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने वीवीपैट मशीन बनाने और इसके लिए धनराशि मुहैया करवाने के आदेश केंद्र सरकार को दिए थे। चुनाव आयोग ने जून 2014 में यह तय किया कि अगले चुनाव यानि वर्ष 2019 के चुनाव में सभी मतदान केंद्रों पर वीवीपैट का इस्तेमाल किया जाएगा। बता दें कि 2014 के चुनाव के बाद विपक्ष बार बार ईवीएम में छेड़छाड़ का आरोप लगाता आ रहा था। सरकार के इस फैंसले से चुनाव पारदर्शी तो होगा ही साथ ही विपक्ष के मुंह पर भी ताला लग जाएगा। [रॉयल बुलेटिन अब आपके मोबाइल पर भी उपलब्ध ,ROYALBULLETIN पर क्लिक करें और डाउनलोड करे मोबाइल एप ]


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