नेहरू की राजनीतिक पाठशाला रहा रायबरेली का किसान आंदोलन..यहीं से पहली बार किया था जनता से सीधा संवाद

नेहरू की राजनीतिक पाठशाला रहा रायबरेली का किसान आंदोलन..यहीं से पहली बार किया था जनता से सीधा संवाद




रायबरेली। अवध के किसानों का विद्रोह और ब्रिटिश हुकूमत द्वारा किये गए दमन स्वरूप मुंशीगंज गोलीकांड ने इतिहास के पन्नों में अमिट छाप छोड़ी है। इस घटना ने देश की आजादी के लिए संघर्ष कर रहे नेताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। लेकिन शायद बहुत कम लोगों को पता होगा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू की प्रथम राजनीतिक पाठशाला अवध और विशेषकर रायबरेली का किसान आंदोलन रहा है। अगर यह कहा जाए कि पंडित नेहरू ने राजनीति का पहला अध्याय यहां से सीखा तो गलत नहीं होगा। शायद यही कारण है कि बाद के वर्षों में भी पंडित नेहरू ने व आजादी के बाद में भी नेहरू परिवार का यहां से जुड़ाव बना रहा।

जानकारों के मुताबिक पंडित नेहरू का रायबरेली में ही पहली बार सीधा संवाद जनता से हुआ था। इसी आंदोलन से उन्होंने किसानों के दर्द और उनमें पनप रही आजादी की भावनाओं को समझा और राष्ट्रीय स्तर पर इसे प्रमुखता से उठाया। 1919 से ही अवध में किसानों का आंदोलन जोर पकड़ चुका था। बाबा रामचंद्र इसको लगातार धार दे रहे थे| रायबरेली में इस आंदोलन ने व्यापक रूप अख्तियार कर लिया था। इस बात से तत्कालीन कांग्रेस के नेता वाकिफ थे। 1921 के जनवरी प्रथम सप्ताह में कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष मोतीलाल नेहरू ने जवाहर लाल नेहरू को किसानों के दर्द को समझने के लिए रायबरेली भेजा। इसका विस्तार से वर्णन पंडित नेहरू ने अपनी आत्मकथा में भी किया है। उल्लेखनीय है कि जिस समय अंग्रेज निहत्थे किसानों पर गोलियां बरसा रहे थे, उस समय पंडित नेहरू को रायबरेली रेलवे स्टेशन पर ही रोक लिया गया था। उस घटना के बाद कई दिन पंडित नेहरु रायबरेली में रहे व किसानों से संवाद करते रहे। शायद यही कारण है कि आजादी के बाद नेहरु के बाद की पीढ़ियों ने रायबरेली को अपनी राजनीतिक कर्मस्थली बनाया।[रॉयल बुलेटिन अब आपके मोबाइल पर भी उपलब्ध ,ROYALBULLETIN पर क्लिक करें और डाउनलोड करे मोबाइल एप ]


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