आईएएस चंद्रकला समेत मौरंग माफिया के 13 ठिकानों पर सीबीआई की छापेमारी

आईएएस चंद्रकला समेत मौरंग माफिया के 13 ठिकानों पर सीबीआई की छापेमारी




दो साल के कार्यकाल में अवैध खनन की जांच के बाद सीबीआई ने कसा शिकंजा

हमीरपुर। सीबीआई ने शनिवार को आईएएस अधिकारी बी चंद्रकला के लखनऊ स्थित आवास पर छापेमारी की। साथ ही करीब 13 ठिकानों पर छापेमार संबंधित दस्तावेजों को खंगाला। बी चंद्रकला पर आरोप है कि उन्होंने हमीरपुर में जिलाधिकारी रहते हुए अवैध खनन पट्टा अपने चहेतों को दिया था।

हमीरपुर जिले में अवैध मौरंग खनन और सिंडीकेट के नेटवर्क से कई सौ करोड़ की वसूली किये जाने के मामले में एमएलसी सहित तमाम मौरंग व्यवसायी सीबीआई के रडार पर आ गये हैं। हमीरपुर की तत्कालीन जिलाधिकारी बी. चंद्रकला के खिलाफ शनिवार को सीबीआई के शिकंजा कसने से यहां खनिज विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। आईएएस बी. चंद्रकला ने हमीरपुर जनपद में 43 मौरंग खनन के पट्टे किये थे, इन्हें कुछ समय बाद हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था।

अपने चहेतों में बांटे 43 खनन पट्टे

आन्ध्रप्रदेश की मूल निवासी बी. चंद्रकला आईएएस 15 अप्रैल 2012 में हमीरपुर आकर जिलाधिकारी का कार्यभार संभाला था। इससे पहले वह इलाहाबाद में सीडीओ थीं। अखिलेश यादव की सरकार में उन्होंने यहां जनपद में 43 मौरंग खनन के पट्टे जारी किये थे। मौरंग की खदानों मेें हमीरपुर, बांदा के एमएलसी रमेश मिश्रा, उनके भाई दिनेश मिश्रा का कब्जा रहा है। रमेश मिश्रा एण्ड कम्पनी के नाम पर एक दर्जन से अधिक मौरंग के पट्टे थे। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष संजय दीक्षित की मां माया देवी के नाम पर भी कई मौरंग खनन के पट्टे थे।

बी. चंद्रकला द्वारा जारी पट्टों को हाईकोर्ट ने किया था रद्द

हाईकोर्ट से अवैध मौरंग खनन की जांच कराने वाले हमीरपुर के अधिवक्ता एवं समाजसेवी विजय द्विवेदी ने शनिवार को दोपहर इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि तत्कालीन जिलाधिकारी बी. चंद्रकला ने नियमों के विपरीत मौरंग खनन के पट्टे जारी किये थे। उन्हें काफी समय पहले हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था। इसके बाद भी जिले में अवैध मौरंग खनन का खेल चलता रहा।

सिंडीकेट के नेटवर्क में हुई करोड़ों की वसूली

बी.चंद्रकला 15 अप्रैल 2012 से 18 जून 2014 तक हमीरपुर की जिलाधिकारी के पद पर रही हैं। उन्होंने अवैध खनन के मामले में कोई कार्रवाई नहीं की थी। द्विवेदी ने बताया कि चंद्रकला के कार्यकाल में यहां सिंडीकेट का नेटवर्क चला। इसके जरिये कई सौ करोड़ रुपये की वसूली हुई। यह पैसा नीचे से ऊपर तक पहुंचाया जाता था। विजय द्विवेदी ने बताया कि सिंडीकेट में संजय दीक्षित का भाई राकेश दीक्षित, विनीत पालीवाल, रामऔतार राजपूत समेत तमाम लोग हिसाब-किताब रखते थे। उन्होंने बताया कि जिले में अवैध खनन की सीबीआई जांच हाईकोर्ट के आदेश से दो साल पहले शुरू हुई थी। इसमें कई बार टीम ने हमीरपुर आकर मौरंग के पट्टे धारकों और अधिकारियों से पूछताछ की थी। [रॉयल बुलेटिन अब आपके मोबाइल पर भी उपलब्ध ,ROYALBULLETIN पर क्लिक करें और डाउनलोड करे मोबाइल एप ]

सीबीआई टीम की छापेमारी जारी

मौरंग के एक पट्टाधारक को टीम ने यहां से उठाकर ले गयी थी। अवैध खनन की जांच में आईएएस बी. चंद्रकला का नाम भी आया था। शनिवार को एमएलसी रमेश मिश्रा, बसपा नेता संजय दीक्षित व खनिज विभाग के रिटायर्ड लिपिक के घर पर सीबीआई की टीमें छापेमारी कर रही है। संजय दीक्षित के भाई राकेश दीक्षित के घर पर भी टीम छापेमारी कर साक्ष्य एकत्र करने में जुटी है। इस कार्रवाई से खनिज विभाग और मौरंग व्यवसायियों में हड़कंप मचा हुआ है। एमएलसी रमेश मिश्रा के कानपुर, बांदा सहित अन्य ठिकानों पर भी सीबीआई टीम छापेमारी कर रही है।


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