मोदी और योगी के कार्यकाल में भव्य राम मंदिर का निर्माण शुरू हो जाना चाहिए: नृत्य गोपालदास

मोदी और योगी के कार्यकाल में भव्य राम मंदिर का निर्माण शुरू हो जाना चाहिए: नृत्य गोपालदास


अयोध्या से राष्ट्रोदय होगा और विश्व को मिलेगी नई दिशा: स्वामी अवधेशानंद जिसे जीता नहीं जा सकता है, वही अयोध्या है: राम बहादुर राय अयोध्या नगर नहीं एक संस्कृति है: जवाहरलाल कौल

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में भव्य राममंदिर का निर्माण शुरू हो जाना चाहिए। राम जन्मभूमि न्यास से अध्यक्ष स्वामी नृत्य गोपालदास ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) में आयोजित अयोध्या पर्व के उद्घाटन कार्यक्रम के अवसर पर यह बातें कहीं।

इससे पहले आईजीएनसीए के अध्यक्ष रामबहादुर राय, स्वामी अवधेशानंद, विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय व महामंत्री पंकज, प्रज्ञा संस्थान के जवाहरलाल कौल व अयोध्या के सांसद लल्लू सिंह ने भी अयोध्या पर्व के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। तीन दिवसीय यह पर्व शुक्रवार को शुरू हो गया है जो रविवार तक चलेगा। इसमें अयोध्या से जुड़े पौराणिक तीर्थों के अलावा स्थानीय व्यंजनों के स्टाल लगाए गए हैं।

अयोध्या पर्व को संबोधित करते हुए नृत्य गोपालदास ने कहा कि सभी हिन्दू चाहते हैं कि जहां रामलला विराजमान हैं, वहां जल्दी मंदिर का निर्माण हो। गोपालदास जी ने यह भी कहा, 'हम न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हैं, लेकिन राम न्यायिक प्रक्रिया और लोकसभा आदि सबसे ऊपर हावी हैं। कारसेवकपुरम में रखे पत्थर प्रतीक्षा कर रहे हैं कब मंदिर का निर्माण होगा।'

अयोध्या पर्व पर अपने संबोधन के दौरान जूनागढ़ पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद ने कहा कि राम एक संस्कृति हैं, जिसका सर्वत्र वास है। कुछ दुस्साहसी यहां लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन यहां किसी को भी विजय नहीं मिलेगी।

उन्होंने कहा कि अयोध्या ऐसी है कि जब देवता भी विचलित या असुरक्षित महसूस करते हैं तो अयोध्या की ओर टकटकी लगाकर देखते हैं कि वहीं इसका समाधान करेगी। इसी से ही राष्ट्रोदय होगा और विश्व को नई दिशा मिलेगी, क्योंकि अयोध्या समाधानमूलक है।

इस अवसर पर आईजीएनसीए के अध्यक्ष पद्मश्री रामबहादुर राय ने कहा कि जिसे जीता नहीं जा सकता है, वही अयोध्या है लेकिन हमारे लोग और न्याय व्यवस्था इससे लड़ने में जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि अयोध्या के चारों तरफ 141 ऐसे पौराणिक स्थान हैं, जिन पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। सिरडी या फिर तिरुपति जाने पर वहां केवल एक स्थान है, जहां जाकर पवित्र हुआ जा सकता है लेकिन अयोध्या के चारों तरफ 141 से ज्यादा पौराणिक स्थान हैं, जो योगियों के स्थान रहे हैं। ऐसे में अयोध्या पर्व का वर्तमान संदर्भ में बहुत महत्व है।

प्रज्ञा संस्थान के जवाहरलाल कौल ने इस अवसर पर कहा कि अयोध्या एक नगर नहीं है, यह एक संस्कृति है और संस्कृति कभी किसी सीमित दायरे में नहीं रहती। उसका विकास हो रहा होता है और वह चारों तरफ फैलती है। ऐसे में अयोध्या का प्रकाश बहुत दूर तक फैलना चाहिए। यह पर्व उसकी सांस्कृतिक पहचान को दिखाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

अयोध्या के सांसद लल्लू सिंह ने कहा कि अयोध्या पर्व को एक उद्देश्य के तहत आयोजित किया गया है ताकि देश उन स्थानों को देख सके, समझे और जान सके। यह आयोजन सफल होगा, इसका सबको विश्वास है। [रॉयल बुलेटिन अब आपके मोबाइल पर भी उपलब्ध ,ROYALBULLETIN पर क्लिक करें और डाउनलोड करे मोबाइल एप ]


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