मेरठ : हथियारों के सप्लायरों की टोह में लगी एनआईए, हड़कम्प

मेरठ : हथियारों के सप्लायरों की टोह में लगी एनआईए, हड़कम्प



मेरठ। आतंकी संगठन आईएस के नए माॅड्यूल में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हथियार सप्लायरों के शामिल होने से एनआईए की निगाह उन पर टेढ़ी हो गई है। किठौर क्षेत्र के रार्धना गांव के नईम के पकड़े जाने के बाद अब एनआईए ने गोपनीय ढंग से अवैध हथियारों की तस्करी के लिए बदनाम गांवों की पड़ताल शुरू कर दी है। इससे हथियार तस्करों में हड़कंप मचा हुआ है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई गांव अवैध हथियारों के निर्माण और सप्लाई करने के लिए पूरे देश में बदनाम है। एनआईए द्वारा आईएस के नए आतंकी माॅड्यूल के खुलासे के बाद से ही इन हथियार तस्करों के तार आतंकियों से जुड़े पाए गए हैं। मेरठ के रार्धना गांव के नईम से पूछताछ में एनआईए को कई अन्य हथियार तस्करों के भी आतंकी कनेक्शन के सुबूत मिले हैं। किठौर क्षेत्र के रार्धना गांव में कई हथियार तस्कर इसमें शामिल है।

इसके अलावा मुजफ्फरनगर के जोला, खालपार, बुढ़ाना, कैराना, हापुड़ जनपद के वैट गांव, गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र, अमरोहा के सैदपुर इम्मा गांव में बड़े पैमाने पर अवैध हथियार बनाए जाते हैं और इन्हें देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा जाता है। यह इनपुट मिलते ही एनआईए ने इन गांवों की गोपनीय रूप से पड़ताल शुरू कर दी है। इससे हथियार तस्करों में हड़कंप मचा हुआ है और कई तस्कर फरार हो गए हैं।

असली से किसी भी तरह कम नहीं होते हथियार

राधर्ना, जोला, खालापार, वैट, लोनी आदि क्षेत्रों में बनने वाले अवैध हथियार किसी भी रूप में असली हथियारों से कम नहीं होते। बिहार के मुंगेर की तर्ज पर इन गांवों में बनने वाले हथियार पूरे देश में सप्लाई किए जा रहे हैं। पुलिस और खुफिया एजेंसियां इन पर शिकंजा कसने में पूरी तरह से नाकाम है। अवैध हथियारों की फैक्ट्रियां धड़ल्ले से इन गांवों में चल रही है। इन गांवों के युवा मुंगेर से बाकायदा प्रशिक्षण लेकर आते हैं और हथियार बनाते हैं।

हिंदूवादी नेताओं के लिए गए थे मेरठ से हथियार

पंजाब में कई हिंदूवादी नेताओं की हत्या में प्रयुक्त हुए हथियार मेरठ में बने थे और यहीं से सप्लाई किए गए थे। इस खुलासे के बाद से ही खुफिया एजेंसियों की निगाह इन अवैध हथियारों के कारीगरों पर लगी हुई है। एसएसपी अखिलेश कुमार का कहना है कि एनआईए का पूरा सहयोग किया जा रहा है। अवैध हथियारों की फैक्ट्रियों को नहीं चलने दिया जाएगा।[रॉयल बुलेटिन अब आपके मोबाइल पर भी उपलब्ध ,ROYALBULLETIN पर क्लिक करें और डाउनलोड करे मोबाइल एप ]


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