फोरेंसिक आडिट होने तक यूनिटेक के प्रमोटर संजय चंद्रा को जमानत नहीं: सुप्रीम कोर्ट

फोरेंसिक आडिट होने तक यूनिटेक के प्रमोटर संजय चंद्रा को जमानत नहीं: सुप्रीम कोर्ट



नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली समूह की तरह यूनिटेक का भी फोरेंसिक ऑडिट करने का आदेश दिया है। फ़ोरेंसिक आडिट होने तक यूनिटेक के प्रमोटर संजय चंद्रा को ज़मानत नहीं मिलेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने दो ऑडिटर नियुक्त करने का आदेश दिये जो साल 2006 से यूनिटेक की 74 कंपनियों व उनकी सहायक कंपनियों के खातों का ऑडिट करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों फोरेंसिक ऑडिटर को 14 दिसम्बर को कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया है।

आज कोर्ट में संजय चंद्रा की ओर से पेश वकीलों ने उनकी ज़मानत के लिए कई बार आग्रह किया, लेकिन कोर्ट ने साफ कर दिया कि जब तक फोरेसिंक ऑडिट नहीं हो जाता, तब तक ज़मानत की अर्जी पर विचार नहीं होगा ।

पिछले 19 सितम्बर को कोर्ट ने यूनिटेक के मालिक संजय चंद्रा और अजय चंद्रा की कस्टडी पेरोल की याचिका खारिज कर दी थी। उसके पहले 11 सितम्बर को भी सुप्रीम कोर्ट ने संजय चंद्रा और अजय चंद्रा को कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि पहले पैसा लाओ उसके बाद हम इस पर विचार करेंगे।

संजय चंद्रा और अजय चंद्रा की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा था कि हमारा मुवक्किल जेल में है और यहां हर आदमी पैसे की बात कर रहा है। तब एचडीएफसी बैंक की तरफ से कहा गया था कि हमारा भी बकाया है। वकील रंजीत कुमार ने कहा था कि जमानत और मुख्य केस की सुनवाई अलग-अलग की जाए।

पिछले 21 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने अपनी तरफ से नियुक्त कमेटी को यूनिटेक के निदेशकों की ऐसी संपत्ति नीलाम करने जिस पर कोई कानूनी विवाद नहीं है। पिछले 27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने यूनिटेक के मालिक संजय चंद्रा की कस्टडी पेरोल की अर्जी को खारिज कर दी थी ।

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पिछले 16 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने यूनिटेक की चेन्नई स्थित 12 एकड़ की जमीन को बेचने की इजाजत दे दी थी। उसके पहले 5 जुलाई को कोर्ट ने यूनिटेक की तीन संपत्तियों को नीलाम करने का आदेश दिया था। पिछले 9 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने यूनिटेक की संपत्तियों को बेचने के लिए सार्वजनिक सूचना आमंत्रित करने का निर्देश दिया था । नौ अप्रैल को ही यूनिटेक ने बिना कर्ज वाली अपनी संपत्तियों की लिस्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी थी । कोर्ट ने यूनिटेक पावर ट्रांसमिशन कंपनी को शपूरजी पालोनी ग्रुप के हाथों बेचने की अनुमति दे दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 30 अक्टूबर, 2017को यूनिटेक को आदेश दिया था कि वो 750 करोड़ दिसम्बर 2017 तक जमा करें लेकिन यूनिटेक ने ये रकम जमा नहीं की।


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