# मी टू: प्रिया रमानी के खिलाफ दायर एमजे अकबर की मानहानि याचिका मामले में दो गवाहों के बयान दर्ज

# मी टू: प्रिया रमानी के खिलाफ दायर एमजे अकबर की मानहानि याचिका मामले में दो गवाहों के बयान दर्ज


नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री और पूर्व पत्रकार एमजे अकबर द्वारा पत्रकार प्रिया रमानी के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि की याचिका पर सुनवाई के दौरान आज दो और गवाहों ने अपनी गवाही दर्ज कराई। आज गवाही दर्ज कराने वालों में वीनू संदल और सुनील गुजराल शामिल हैं। इसके पहले संडे गार्जियन अखबार की संपादक जोयिता बसु ने अपना बयान दर्ज कराया था। एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल ने अन्य गवाहों की गवाही के लिए 11 जनवरी की तिथि तय की है।

आज अपनी गवाही के दौरान सुनील ने कोर्ट को दिए अपने बयान में कहा कि वो एम जे अकबर को पिछले 40 साल से जानते हैं और जब सोशल मीडिया पर उन्होंने अकबर को लेकर ट्वीट्स देखे तो उन्हें बहुत धक्का लगा। वीनू संदल ने कहा कि उन्हें प्रिया रमानी के आरोपों को देखने के बाद काफी आश्चर्य हुआ।

पिछले 12 नवम्बर को संडे गार्जियन अखबार की संपादक जोयिता बसु ने अपने बयान दर्ज कराए थे। जोयिता ने एमजे अकबर का समर्थन करते हुए कहा था कि प्रिया रमानी के ट्वीट से एमजे अकबर की छवि को काफी नुकसान पहुंचा है।

अपने बयान में जोयिता बसु ने कहा था कि प्रिया रमानी ने एमजे अकबर के खिलाफ जानबूझकर अपमानजनक ट्वीट किए ताकि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके। बसु ने कहा कि उन्होंने 10 अक्टूबर और 13 अक्टूबर को प्रिया रमानी के ट्वीट देखे थे । उन ट्वीट से लोगों के मन में एमजे अकबर के बारे में संदेह पैदा हो गया। जोयिता बसु ने कहा था कि उन्होंने एमजे अकबर के साथ करीब 20 वर्षों तक काम किया है और कभी भी अखबार के किसी कर्मचारी से कुछ भी गलत नहीं सुना । बसु ने कहा था कि एमजे अकबर एक पब्लिक फिगर थे। उन्होंने कहा कि मैं एमजे अकबर का काफी सम्मान करती हूं । मैं प्रिया रमानी के ट्वीट देखकर आश्चर्यचकित और निराश हो गई थी।

पिछले 31 अक्टूबर को एमजे ने अपना बयान दर्ज कराया था । एमजे अकबर ने अपने बयान में कहा था कि पत्रकार प्रिया रमानी के झूठे और बेबुनियाद ट्वीट की वजह से उनकी प्रतिष्ठा को गहरी चोट पहुंची । उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा तक देना पड़ा ।

उन्होंने कहा था कि संपादक और लेखक के रूप में उनकी अच्छी छवि है। उन्होंने कहा था कि प्रिया रमानी के आरोपों ने लोगों की नजर में उनकी छवि को गिराया है। इन आरोपों ने मेरे दोस्तों, मेरे सहयोगियों मेरे राजनीतिक दोस्तों की नजर में गिराने का काम किया है ।

एमजे अकबर ने कहा था कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक पत्रकार के रूप में की । उन्होंने अपने राजनीतिक करियर के बारे में कहा कि मैंने 2014 में सार्वजनिक जीवन शुरू किया था और भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बना। फिलहाल मैं मध्य प्रदेश से सांसद हूं। उन्होंने कहा था कि प्रिया रमानी के ट्वीट पर मेरा ध्यान अफ्रीका के आधिकारिक दौरे से लौटने के बाद गया। उन्होंने कहा था कि प्रिया रमानी के ट्वीट का संबंध vogue india मैगजीन में छपे एक आलेख से है। वह आलेख एक इतिहास था और सबसे पहले अक्टूबर 2017 में छपा था। अकबर ने कहा था कि प्रिया रमानी के 10 और 13 अक्टूबर के ट्वीट ने मेरी छवि को काफी नुकसान पहुंचाया। उन ट्वीट को कई जगह छापा गया और सोशल मीडिया पर उसकी चर्चा होती रही।

अकबर की वकील गीता लूथरा ने कोर्ट को उन पब्लिकेशंस की सूची दी जिन्होंने वो ट्वीट छापे। अकबर ने कहा था कि रमानी के ट्वीट कई बार रीट्वीट किए गए और सोशल मीडिया पर शेयर किए गए। उन्होंने कहा कि ट्वीट में सुसंगतता नहीं थी। जब vogue india में 2017 में आलेख छपा था तो उसमें मेरा नाम शामिल नहीं था। प्रिया रमानी ने लिखा था कि मेरा नाम पहले क्यों नहीं शामिल किया गया। ये इसलिए किया गया कि मैंने कुछ नहीं किया था। आठ अक्टूबर के ट्वीट में इसका उल्लेख है।

एमजे अकबर ने पिछले 15 अक्टूबर को प्रिया रमानी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया था। उन्होंने प्रिया रमानी द्वारा अपने खिलाफ यौन प्रताड़ना का आरोप लगाने के बाद ये आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है।


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